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कच्चे तेल की कीमतों को लेकर आपात बैठक से पहले ही रूस और सऊदी अरब में खींचतान शुरू

कच्चे तेल की कीमतों को कई साल के निचले स्तर से उबारने के लिये ओपेक तथा अन्य बड़े उत्पादक देशों की प्रस्तावित आपात बैठक से पहले ही खींचतान के संकेत दिखने लगे हैं। इस बैठक से पहले रूस और सऊदी अरब एक-दूसरे पर दोष आरोपित करने में जुट गये हैं। सऊदी अरब की सरकारी प्रेस एजेंसी ने विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के हवाले से शनिवार को कहा, ‘‘सऊदी अरब और 22 अन्य देश समझौते को आगे बढ़ाने तथा उत्पादन में कटौती करने के लिये रूस को मना रहे थे, लेकिन रूस ने ही समझौते को मानने से इनकार कर दिया था ।’’

प्रिंस फैसल ने यह बयान रूस के उस इल्जाम को लेकर दिया है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के लिये सऊदी अरब जिम्मेदार है। सऊदी अरब के तेल मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने रूस के ऊर्जा मंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के उस बयान की आलोचना की जिसमें नोवाक ने कहा था कि सऊदी अरब शेल (अमेरिकी कच्चा तेल) के उत्पादकों का हिस्सा हथियाना चाहता है। प्रिंस अब्दुलअजीज ने इसपर हैरानी जताते हुए कहा कि सऊदी अरब शेल उद्योग के खिलाफ बताया जाना पूरी तरह से गलत है, और रूस के हमारे मित्र भी यह अच्छी तरह से जानते हैं।

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को ट्वीट कर कहा था कि , ‘‘रूस और सऊदी अरब उत्पादन में एक करोड़ बैरल की कटौती करने जा रहे हैं।’’ हालांकि,  ट्रंप ने विस्तार से इस बारे में कुछ नहीं कहा। ऐसे में कयास लगाएं जा रहे हैं कि सऊदी अरब के मंत्रियों ने ट्रंप सरकार से टकराव को टालने के लिये ये बयान दिये हैं। उल्लेखनीय है कि कच्चे तेल में उत्पादन को लेकर कटौती पर रूस और सऊदी अरब के सहमत नहीं होने के बाद से इसकी वैश्विक कीमतों में 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। ब्रेंट क्रूड अभी 24 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास चल रहा है, जबकि साल भर पहले यह 70 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर था।