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34 साल बाद पथराई आंखों को सुकून

नई दिल्ली : 1984 हत्याकांड के दाेषियों को कालकोठरी तक पहुंचाने के लिए 34 साल का वक्त लग गया। इस बीच हत्याकांड के पीड़िताओं की आंखें न्याय के लिए पथरा गई थीं, लेकिन देरी से ही सही इन पथराई आंखों को 31 दिसंबर 2018 को हत्याकांड के दोषियों को जेल जाते देख सुकून मिला। पुलिस की गाड़ी में बैठ जेल जाते हुए सज्जन कुमार को देखकर कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर के बाहर खड़ी पीड़ित विधवाओं की आंखें भर आईं। बहते आंसुओं को पोंछती हुई बार-बार जज को शुक्रिया करती पीड़िता छमनी कौर और लच्छी कौर ने बताया कि हमें न्याय दिलाने के लिए सुक्रिया जज साहब!

हमने तीन दिन तीन रातें कांपते हुए अपने बच्चों को सीने से छुपाए रखा। अभी एक मगरमच्छ जेल गया है बाकि दो बड़े मगरमच्छ जगदीश टाइटलर और कमलनाथ अभी भी बाहर हैं उन्हें जेल तक पहुंचाकर ही हम ठंडा पानी पीएंगे। वहीं पप्पी कौर ने बताया कि तीन दिनों तक चले इस हत्याकांड में किसी ने पति तो किसी ने जिगर का टुकड़ा खो दिया। गोपी कौर ने अपने पति को खोया।

दोषियों को जेल जाते देख उन्होंने कहा कि गुरु के घर देर है अंधेर नहीं। हम दिन-रात अपने गुरु को याद कर दोषियों को सजा दिलवाने के लिए दुआ करते थे। आज गुरु कृपा से हमें कुछ सुकून जरूर मिला है। इस दौरान पीड़िताओं में सुरजीत सिंह, बलवीर सिंह, इंद्र सिंह आदि भी मौजूद रहे।

सज्जन के आत्मसमर्पण के बाद सोशल मीडिया पर हुए एक्टिव दोपहर करीब डेढ़ बजे तक सोशल मीडिया में किशन खोखर और महेंद्र यादव के सरेंडर की खबरें चलती रहीं। इस बीच सज्जन कुमार की आत्मसमर्पण की खबरें नहीं आने से कोर्ट परिसर में सुगबुगाहट दिखाई दी। लेकिन दो बजे के बाद जैसे ही सज्जन कुमार के सरेंडर की खबरें सामने आईं एक दम से सोशल मीडिया में लोग एक्टिव हो गए।

सिख नेताओं ने दिखाई एकजुटता...

दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने सज्जन के जेल जाने को सिख सोच में आए ऐतिहासिक बदलाव के तौर पर परिभाषित किया। उन्होंने सकारात्मक तरीके से चुनौतीपूर्ण मामलों को सूझबूझ के साथ हल करने के सिखों में विकसित हो रहे रुझान को कौम के भविष्य के लिए अच्छा बताया है।

जीके ने कहा कि आज का सिख बंदूक की जगह कलम से लड़ाई जीतने की ओर आगे बढ़ता नजर आ रहा है। वहीं कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सिखों के 34 वर्षों के संघर्ष को आज जीत मिली है। अब गांधी परिवार को इस दोषी को 34 साल तक बचाने के लिए सिख भाईचारे और देशवासियों से माफी मंगनी चाहिए।

राष्ट्रीय सिख संगत (आरएसएस) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अवतार सिंह शास्त्री ने बताया कि 34 वर्षों बाद आज हमें खुशी मनाने का मौका मिला है। इसके लिए मोदी सरकार बधाई की पात्र है। जिन्होंने एसआईटी गठित कर दोषियों को जेल की सलाखों तक पहुंचाया। इससे पहले भी कांग्रेस के शासन काल में तीन बार सज्जन कुमार के खिलाफ वारंट जारी हुआ था लेकिन हर बार वह दबंगई दिखाकर मुक्त हुए।

आप पूर्व विधायक जरनैल सिंह ने इसे ऐतिहासिक जीत मिली है। इसके बाद अब दंगों की राजनीति करने वालों को निश्चित रूप से सबक मिलेगा।

1984 सिख विरोधी दंगा : कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार ने कड़कड़डूमा कोर्ट में किया समर्पण

- मृत्युंजय राय