सीबीएसई ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय को जानकारी दी कि कथित रूप से लीक हुआ दसवीं कक्षा का गणित का प्रश्नपत्र दोबारा नहीं कराने का फैसला विज्ञान , गणित और अंग्रेजी के प्रश्नपत्रों का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद किया गया।

सीबीएसई ने कहा कि यह सोचा समझा फैसला है और वे केवल एक छात्र, जो गणित की पुन : परीक्षा चाहता है , उसके लिए लाखों छात्रों को परेशानी में नहीं डाल सकते।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने परीक्षा फिर से कराने की मांग कर रहे छात्र के वकील से कई प्रश्न पूछे।

अदालत ने छात्र के वकील से पूछा कि गणित की परीक्षा को लेकर क्या मुश्किलें और परेशानी है और वह पुन : परीक्षा कराने पर जोर क्यों दे रहे हैं।

पीठ ने कहा , ‘‘ आपके मुवक्किल ( छात्र ) पुन : परीक्षा नहीं कराने के फैसले से कैसे प्रभावित हैं। अगर आप इस तरह की बड़ी राहत मांग रहे हैं तो आपको इसे बड़े नजरिये से देखना होगा। ’’  पीठ ने कहा , ‘‘ उन्होंने न केवल गणित के प्रश्नपत्र बल्कि विज्ञान और अंग्रेजी का विस्तृत विश्लेषण किया है ताकि देखा जा सके कि कुछ लीक तो नहीं हुआ। ’’ अदालत ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तारीख तय की ।

अदालत ने कहा कि याचिका में छात्र को हुई हानि पर एक शब्द भी नहीं कहा। अदालत ने कहा कि कई बार अधिवक्ताओं को वृहद लोक हित पर गौर करना चाहिए।

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