दिल्ली की एक अदालत ने दो पुलिसकर्मियों को ड्यूटी से रोकने और उनमें से एक को गंभीर रूप से घायल करने के 2013 के मामले में दोषी एक व्यक्ति को यहां एक धर्मार्थ अस्पताल में पैसे लिये बिना एक साल तक मुफ्त सेवा देने का निर्देश दिया। अफान को एक साल के कारावास की सजा सुनाने वाले जिला न्यायाधीश ए एस जयचंद्र ने उसके अच्छे व्यवहार पर संज्ञान लिया और उसे परिवीक्षा पर छोड़ दिया। अदालत ने उससे कड़कड़डूमा स्थित धर्मार्थ अस्पताल कोट्टाकल आर्य वैद्यशाला में पैसे लिये बिना एक साल तक हर सप्ताह कम से कम दो दिन मुफ्त सेवा देने को कहा। अफान को भारतीय दंड संहिता की धारा 186 (लोक सेवकों को ड्यूटी से रोकना), 333 (लोक सेवकों को रोकने की मंशा से गंभीर रूप से चोट पहुंचाना) और 353 (लोक सेवकों पर हमला) के तहत दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।