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ऑक्सीजन की कमी पर दिल्ली HC की केंद्र को फटकार: आप शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपा सकते हैं, हम नहीं

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र से कारण बताने को कहा कि कोविड-19 मरीजों के उपचार के लिए दिल्ली को ऑक्सीजन की आपूर्ति पर आदेश की तामील नहीं कर पाने के लिए उसके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए।

अदालत ने कहा, ‘‘आप शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपा सकते हैं, हम ऐसा नहीं करेंगे। क्या आपको इन चीजों के बारे में पता नहीं है।’’न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने केंद्र की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि मौजदा चिकित्सकीय ढांचे के आलोक में दिल्ली 700 मीट्रिक टन चिकित्सकीय ऑक्सीजन की हकदार नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम हर दिन इस खौफनाक हकीकत को देख रहे हैं कि लोगों को अस्पतालों में ऑक्सीजन या आईसीयू बेड नहीं मिल रहे, कम गैस आपूर्ति के कारण बेड की संख्या घटा दी गयी है।’’अदालत ने केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस पर जवाब देने के लिए बुधवार को अदालत के समक्ष हाजिर होने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का 30 अप्रैल का विस्तृत आदेश दिखाता है कि उसने केंद्र को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मुहैया कराने का निर्देश दिया था ना कि महज 490 मीट्रिक टन। उच्चतम न्यायालय पहले ही आदेश दे चुका है, अब उच्च न्यायालय भी कह रहा है कि जैसे भी हो केंद्र को हर दिन दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति करनी होगी।

वहीं दिल्ली में इस ऑक्सीजन की स्थिति कितनी खराब है, इस बात का अंदाजा इस खबर से लगाया जा  सकता है कि दिल्ली में भारतीय सेना के बेस अस्पताल को ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सेना के सूत्रों ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा आपूर्ति में कमी करने के बाद इस तरह की स्थिति पैदा हुई है।

अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि हालांकि तुरंत ऑक्सीजन की कमी नहीं है लेकिन रोजाना के कोटे में कमी से कोविड-19 रोगियों के इलाज में गंभीर परेशानियां आ सकती हैं।बेस अस्पताल में 450 बिस्तरों की क्षमता है जिसे कुछ दिन पहले कोविड-19 केंद्र में बदला गया है।

सूत्रों ने कहा कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे को रक्षा मंत्रालय में संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया गया है और आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।एक सूत्र ने बताया कि अस्पताल को पहले जितनी आपूर्ति मिल रही थी, उसका लगभग 50 फीसदी कम कर दिया गया है।एक सूत्र ने कहा, ‘‘घबराने की बात नहीं है क्योंकि अस्पताल ऑक्सीजन आपूर्ति की कमी को पूरा करने का प्रयास कर रहा है।’’