चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी मतदाताओं को देने के लिये प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिये जाने वाले विज्ञापन का खर्च उम्मीदवार के चुनाव खर्च का ही हिस्सा होगा। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को लंबित आपराधिक मामलों की मतदाताओं को जानकारी देने के लिये कम से कम तीन बार विज्ञापन देना अनिवार्य है।

पिछले साल लागू की गयी इस व्यवस्था के तहत विज्ञापन का खर्च उम्मीदवार के चुनाव खर्च का ही हिस्सा होता है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 10 अक्तूबर इस बारे में जारी दिशानिर्देशों के तहत आयोग ने उम्मीदवारों के लिये आपराधिक मामलों का विज्ञापन देने की अनिवार्यता को लागू किया था। लोकसभा चुनाव में इस व्यवस्था को पहली बार अमल में लाया गया है।

 उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों को पहले ही यह सूचित किया जा चुका है कि उम्मीदवारों को इस विज्ञापन का खर्च अपने चुनाव खर्च में शामिल करना होगा। हाल ही में कुछ राजनीतिक दलों ने आयोग से इस खर्च को उम्मीदवार के चुनाव खर्च में शामिल करने के बजाय राजनीतिक दलों के चुनाव खर्च में शामिल करने का अनुरोध किया था।