नई दिल्ली : खुशियों और रंगों के त्योहार होली पर चारों तरफ रौनक का माहौल बना हुआ है। बाजार में गुलाल, पिचकारियों और गुब्बारों की खरीदारी के साथ लोग अपने करीबियों को गुजिया बांट रहे हैं। पर अफसोस कि ऐसे माहौल में दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 22 हजार से अधिक गेस्ट टीचर्स दुख और बेबसी के दौर का सामना कर रहे हैं।

दरअसल 28 फरवरी को अनुबंध खत्म होने के बाद से ही 22 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक सुरक्षित नौकरी की मांग को लेकर धरने प्रदर्शन पर बैठ हुए हैं। गेस्ट टीचर्स का कहना है कि सोमवार को उन्हें अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे 18 दिन पूरे हो गए हैं। इसके बावजूद उनकी 60 साल की पॉलिसी को लागू करने की प्रमुख मांग और अन्य मांगों को लेकर सरकार और उप राज्यपाल की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है।

गेस्ट टीचर शोएब राणा ने बताया कि बीते कुछ दिनों से अतिथि शिक्षक की मांगों को लेकर नेताओं द्वारा उनसे मुलाकात तो की जा रही है, लेकिन इसका कोई लाभ होता नजर नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि गुरुवार को होली का त्योहार है और इस दिन सभी देशवासी खुशी के साथ रंगों का त्योहार मनाएंगे लेकिन अतिथि शिक्षकों का धरना प्रदर्शन उस दिन भी जारी रहेगा।

समर्थन नहीं न्याय चाहिए
ऑल इंडिया गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन के सदस्य अरुण डेढ़ा ने बताया कि हजारों गेस्ट टीचर्स अपने हक और जायज मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। इस दौरान सरकार के साथ अन्य विपक्षी दल के नेताओं ने भी उनकी मांगों का समर्थन किया है लेकिन उन्हें समर्थन नहीं न्याय चाहिए। हरियाणा की तर्ज पर पॉलिसी लागू होनी चाहिए।