नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट के शिक्षा निदेशालय के निजी स्कूलों में फीस बढ़ाेतरी रोकने के सिंगल बेंच के आदेश को अब डबल बेंच में चुनौती दी जा सकती है। क्योंकि जस्टिस सी हरिशंकर ने अपने दिए फैसले के तहत शिक्षा निदेशालय के बीते वर्ष के सरकारी जमीन पर बने प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ोतरी रोकने के सर्कुलर को निरस्त कर दिल्ली के 400 से ज्यादा निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी का रास्ता साफ कर दिया है। इसके अलावा प्राइवेट स्कूल पिछले सत्र 2017-18 की बढ़ी हुई फीस भी अभिभावकों से वसूलने के लिए भी स्वतंत्र होंगे।

इस मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 31 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। और 15 मार्च को सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया है। वकील कमल गुप्ता ने बताया कि शिक्षा निदेशालय ने 13 अप्रैल 2018 को सर्कुलर जारी किया था कि प्राइवेट स्कूलों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए फीस बढ़ाने से रोका जा रहा है। इसके अलावा शिक्षा निदेशालय ने प्राइवेट स्कूलों को ये भी निर्देश दिए कि वो बढ़ाकर ली गई फीस अभिभावकों को वापस कर दें।

इस आदेश के खिलाफ 400 से अधिक प्राइवेट स्कूलों की बनी एक्शन कमेटी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हालांकि उन्हें हाईकोर्ट से बीते साल मई में ही अंतरिम राहत मिल गई। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के इस आदेश को लागू करने से तब तक के लिए रोक लगा दी। जब तक वह इस पर फैसला न सुना दे। वकील कमल गुप्ता के अनुसार हाईकोर्ट ने स्कूल एक्शन कमेटी की उस दलील को माना, जिसमें कहा गया कि वह फीस वृद्धि शिक्षा निदेशालय के 17 अक्टूबर 2017 में जारी किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर कर सकते हैं।

इसके आधार पर शिक्षा निदेशालय ने गैर सहायता वाले मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। 2017 में शिक्षा विभाग ने तीन आदेशों में फीस बढ़ाने की मंजूरी दी थी। इसके अलावा एक्शन कमेटी की ओर से कोर्ट को बताया कि सरकार वोट बैंक की राजनीति के कारण फीस बढ़ाने नहीं दे रही है।

इसलिए ही फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं होने से शिक्षकों को 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुकूल वेतन देने में देरी हो रही है। जबकि सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि पहले स्कूलों के खातों की जांच होगी, इसके बाद फीस बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। इस पर ही हाईकोर्ट बेंच ने सर्कुलर निरस्त करते हुए स्कूलों को राहत दी।