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उत्तराखंड सरकार की खुले में शौच से मुक्ति की घोषणा गलत : कैग

उत्तराखंड सरकार द्वारा पिछले साल की गयी, प्रदेश के खुले में शौच से मुक्त 'ओएफडी' होने की घोषणा सही नहीं थी और भौतिक सत्यापन में कुल 1143 व्यक्तिगत शौचालयों में से 41 का निर्माण नहीं हो पाया गया जबकि 34 शौचालय निर्माणाधीन थे। यह तथ्य भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक 'कैग' की नयी रिपोर्ट में उजागर हुआ है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि इस योजना में वित्तीय प्रबंधन भी अपर्याप्त था क्योंकि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2016-17 के दौरान 10.58 करोड़ रूपये का अपना हिस्सा जारी नहीं किया गया । दो अक्तूबर, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गये स्वच्छ भारत मिशन 'ग्रामीण' के तहत ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता के स्तर में सुधार कर ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कर वर्ष 2019 तक स्वच्छ भारत के संकल्प तक पहुंचना है।

उत्तराखंड सरकार द्वारा 31 मई, 2017 को घोषणा की गयी कि उसने राज्य में खुले में शौच से मुक्ति की स्थिति प्राप्त कर ली है। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में स्वच्छता और स्वच्छता प्रथाओं की स्थिति का आंकलन करने के लिए 2013-14 में आधारभूत सर्वेक्षण किया गया था जिसके आधार पर एक परियोजना कार्यान्वयन योजना जून, 2016 में केंद्र सरकार को भेजी गयी। इसमें यह निर्धारित किया गया था कि मिशन अवधि के दौरान राज्य में 4,89,108 व्यक्तिगत घरेलू शौचालय, 831 सामुदायिक स्वच्छता परिसर और 7,900 ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं का निर्माण किया जायेगा।

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राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई ने जून 2015 से अगस्त 2015 के मध्य किये गये पुनरीक्षित सर्वेक्षण के आधार पर चिन्हित किये गये 1,79,868 परिवारों की सूची पूर्व चिन्हित लाभार्थियों की सूची में शामिल करने के लिए भारत सरकार को लिखा। लेकिन 30 जून, 2015 की समय सीमा समाप्त होने के बाद इन्हें कार्यान्वयन योजना में शामिल नहीं किया जा सका। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन 'ग्रामीण' के तहत राज्यों को प्रत्येक वर्ष अप्रैल में लाभार्थियों के आंकड़ों को अपडेट किया जाना था लेकिन राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई यह करने में भी विफल रही जिसके कारण ये 1,79,868 अतिरिक्त परिवार योजना में शामिल नहीं किये गये। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य को केंद्रांश जारी करने के 15 दिन के भीतर कार्यक्रम के कार्यान्वयन के अपने 10 प्रतिशत अंश को जारी करना था।

यह पाया गया कि वर्ष 2014—17 की अवधि के दौरान भारत सरकार ने 306.58 करोड़ रूपए अवमुक्त किये जिसके सापेक्ष राज्य सरकार को 34.06 करोड़ रूपए जारी करने थे। राज्य सरकार ने अप्रैल 2017 तक राज्यांश के सापेक्ष केवल 23.48 करोड़ रूपए अवमुक्त किये थे और शेष 10.58 करोड़ रूपये जारी नहीं किये। चूंकि 1,79,868 परिवारों को परियोजना कार्यान्वयन योजना में शामिल नहीं किया गया, इसलिए वास्तविक आच्छादन केवल 67.39 प्रतिशत ही रहा। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यक्तिगत घरेलू शौचालय के निर्माण के संबंध में आंकड़ों की विश्वसनीयता भी संदिग्ध थी क्योंकि जांच में पाया गया कि 22 दिसंबर 2016 को खुले में शौच से मुक्त घोषित किये गये अल्मोड़ा जिले की 241 ग्राम पंचायतों को 5,672 शौचालयों के निर्माण हेतु चार दिन बाद यानि 26 दिसंबर, 2016 से तीन जनवरी, 2017 के बीच दो करोड़ रूपये की धनराशि अवमुक्त की गयी।

कैग का कहना है कि इससे यह पता चलता है कि जिला अल्मोड़ा घोषणा के समय दिसंबर 2016 में खुले में शौच से मुक्त नहीं हुआ था। हालांकि, नमामि गंगे के तहत गंगा नदी के किनारे स्थित 132 ग्राम पंचायतों के संबंध में राज्य सरकार ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि खुले में शौच से मुक्त ग्राम पंचायतों की घोषणा बेसलाइन सर्वेक्षण 2012 में निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर की गयी थी। कैग की रिपोर्ट पर स्थिति स्पष्ट करते हुए अपर सचिव एवं निदेशक, नमामि गंगे डॉ.राघव लंगर ने बताया कि खुले में शौच से मुक्त ग्राम पंचायतों की घोषणा जिलों द्वारा बेसलाइन सर्वेक्षण 2012 में निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर की गई थी।

शौचालयों के निर्माण के बाद अगस्त 2015 से दिसम्बर 2016 के मध्य इन ग्राम पंचायतों को खुले में शौच की प्रथा से मुक्त घोषित किया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी 132 ग्राम पंचायतों में 430 परिवार ऐसे हैं जिनके पास शौचालय की सुविधा नहीं है। ये परिवार या तो बेसलाइन सर्वेक्षण 2012 में छूट गये थे या जनसंख्या वृद्धि एवं परिवार विभक्त होने के कारण बढ़ गये हैं। डॉ लंगर ने कहा कि इस साल मई में जिलों द्वारा किये गये त्वरित सर्वेक्षण के आधार पर पूरे राज्य में बेसलाइन सर्वेक्षण 2012 के बाद बढ़े हुए एवं इस सर्वेक्षण में छूटे लगभग 83,945 शौचालय विहीन परिवारों को चिन्ह्ति किया गया है। उन्होंने बताया कि इन परिवारों को योजना का लाभ देने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त बजटीय संसाधन से 100.73 करोड़ रूपए की अतिरिक्त धनराशि की मांग की गयी है।

परियोजना निदेशक ने बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत चिन्हित राज्य के सात जिलों, चमोली, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, रूद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी की गंगा नदी के किनारे स्थित 132 ग्राम पंचायतों में आधारभूत सर्वेक्षण 2012 के अनुसार, कुल 29,029 परिवार में से 10,019 परिवार शौचालय विहीन पाये गये थे। इन शौचालय विहीन परिवारों में से 9,619 परिवारों को विभिन्न योजनाओं के दायरे में लिया गया जबकि शेष 144 परिवार स्वयं के संसाधनों से लाभान्वित हुए ।