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कोरोना वारियर्स का संक्रमित होना

कोरोना महामारी के दौरान डाक्टरों, नर्सों, गैर मैडिकल स्टाफ समेत सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स ने सराहनीय भूमिका निभाई। महामारी की विकट स्थिति में लगातार 24 घंटे काम करते हुए लोगों का जीवन बचाया लेकिन इनमें से अनेक डाक्टरों, नर्सों ने अपनी जान गंवा दी। गर्मियों के मौसम में कोरोना किट पहन कर दिन-रात दूसरों की जिन्दगी बचाना कितना जोखिम भरा होता है, यह उन लोगों से पूछिए जो महामारी की पीक के दौरान कई-कई हफ्ते अपने घर तक नहीं गए। परिवार और बच्चों से दूर रहे। समूचा राष्ट्र इन कोरोना योद्धाओं का ऋणी है। उनके सहयोग और समर्पण के लिए देश उनका हमेशा आभारी रहेगा।

कोरोना टीकाकरण अभियान में फ्रंटलाइन वर्करों ने कहीं पहाड़ियों में लम्बा रास्ता तय कर दूर-दराज के इलाकों में लोगों का टीकाकरण किया तो कहीं उन्हें विषम परिस्थितियों में नदियां भी पार करनी पड़ी। देश में हैल्थ केयर वर्कर्स की संख्या लगभग एक करोड़ है, जिसमें डाक्टर, नर्स, अस्पताल स्टाफ, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं। वहीं फ्रंटलाइन वर्कर्स की संख्या 2 करोड़ है, इसमें पुलिसकर्मी, केन्द्रीय सुरक्षा बलों के जवान, सेना के जवान, होमगार्ड, सिविल डिफैंस संगठन, डिजास्टर मैनेजमेंट वालिंटियर्स, नगर निकाय कर्मी, सफाई कर्मी शामिल हैं। इन सभी ने महामारी के दौरान दोहरी भूमिका निभाई। इन्होंने कोरोना मामलों की शीघ्र पहचान कर उनके उपचार में उचित कार्यवाही की बल्कि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए समुदाय में महत्वपूर्ण संदेशों का प्रचार करने के साथ लोगों को जागरूक भी किया। गांव-गांव तक जाकर लोगों से सम्पर्क करने और उन्हें जागरूक करने में आशा वर्कर्स और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। तीसरी लहर से एक और आफत आ गई है। दिल्ली के पांच बड़े अस्पतालों में लगभग 800 से ज्यादा डाक्टर कोविड पॉजिटिव हो गए हैं। इन डाक्टरों के सम्पर्क में आए अन्य डाक्टर और पैरा मैडिकल स्टाफ भी आइसोलेशन में हैं। इतनी बड़ी संख्या में डाक्टरों और पैरा मैडिकल स्टाफ का कोरोना संक्रमित हो जाने से स्वास्थ्य ढांचे पर बुरा असर पड़ रहा है।

अस्पतालों में रूटीन चैकअप ओपीडी और गैर जरूरी सर्जरी को बंद कर दिया गया है। कोरोना वायरस की तीसरी लहर में नियमों को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है। दूसरी लहर के शांत होते ही ओपीडी और सर्जरी को शुरू कर दिया गया था लेकिन तीसरी लहर के आने तक बचाव के कोई कदम नहीं उठाए गए इससे डाक्टर कोरोना से प्रभावित हो रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि कोरोना योद्धाओं के पास अस्पतालों में सुरक्षा के लिए पीपीई किट प्रोटेक्टिव गेयर की कमी पड़ रही है। इसमें कोई संदेह नहीं कि सरकार वेंटिलेटर ऑक्सीजन बैड, बिल्डिंग सब कुछ खरीदकर दे सकती है लेकिन डाक्टर पैसे देकर एक झटके में नहीं खरीदे जा सकते। एक रेंजीडैंट डाक्टर को तैयार होने में कम से कम 10 साल का समय लगता है। अगर डाक्टर और उनसे जुड़ा स्टाफ ही बीमार होने लगे तो फिर मरीजों का इलाज कौन करेगा। हैल्थकेयर सिस्टम तभी मजबूत होगा जब डाक्टर खुद स्वस्थ रहेंगे। एम्स में काम करने वाले लगभग 350 रेजीडेंट डाक्टर कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं। यह संख्या तो केवल डाक्टरों की है। अगर इनके साथ फैकल्टी और पैरा मैडिकल स्टाफ जोड़ लें तो यह आंकड़ा बहुत बड़ा हो जाएगा।

देश की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश और कर्मचारी भी संक्रमित पाए गए हैं और लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद के 400 के लगभग कर्मचारी संक्रमित पाए गए हैं। यह बहुत गंभीर चिन्ता का विषय है। अब जबकि संसद का बजट सत्र जनवरी के अंत में शुरू होने वाला है इसलिए चिन्ताएं काफी बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस के एक हजार जवान भी संक्रमित पाये गए हैं। यह रहत की बात है कि आज से डाक्टरों, नर्सों और अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों, जो गंभीर बीमारियों से पीडि़त हैं उन्हें भी डाक्टरों की सलाह पर बूस्टर डोज लगाने का काम शुरू कर दिया है। बूस्टर डोज सरकारी वैक्सीन केन्द्रों पर भी मुफ्त उपलब्ध है। हालांकि प्राइवेट अस्पतालों में इसके पैसे देने पड़ेंगे। केन्द्र सरकार ने कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं लेकिन लोग अब भी लापरवाही बरत रहे हैं। अदालतें बार-बार राज्य सरकारों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास करा रही हैं। निर्वाचन आयोग ने भी चुनावी रैलियों पर पाबंदी लगाते हुए डिजिटल प्लेटफार्मों पर चुनाव प्रचार करने पर जोर दिया है लेकिन चुनावी राज्यों में राजनीतिक दलों के उम्मीदवार कोरोना प्रोटोकोल की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। केन्द्रीय मंत्रियों और राज्य सरकार के मंत्रियों के लगातार कोरोना संक्रमित होने की खबरें आ रही हैं। विदेशों से आने वाले यात्री लगातार कोरोना संक्रमित  पाए जा रहे हैं। इटली से अमृतसर पहुंचने वाली उड़ानों से आए यात्री कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इटली दुनिया के उन शुरुआती देशों में शामिल है जहां कोरोना से सबसे पहले कहर बरपाया था। महज 6 करोड़ से कम आबादी वाले देश इटली में 2 लाख के लगभग कोरोना मामले सामने आए हैं। साफ है कि इटली से आने वाली उड़ानों से पहले यात्रियों की ठीक तरह से जांच नहीं की गई। अमृतसर में यात्रियों की जांच की गई तो लगभग सभी उड़ानों में ज्यादातर यात्री संक्रमित पाए गए। निजी विमानन कंपनियां सुरक्षा मानदंडों को ताक पर रख कर महंगी टिकटों से कमाई करने में जुटी हैं। भारत कोरोना दिशा-निर्देशों से समझौता नहीं कर सकता। भारत में आए दिन कोरोना मामलों का रिकार्ड टूट रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उच्च स्तरीय बैठक कर जिला स्तर पर स्वास्थ्य का बुनियादी ढांच स्थापित करने और हैल्थ वर्करों समेत देशभर में टीकाकरण अभियान तेज करने पर जोर दिया है। कदम-कदम पर स​चेत रह कर ही हम खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। हमें कोरोना योद्धाओं की रक्षा करनी होगी तभी हम कोरोना से लड़ाई जीत सकते हैं।