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संपादकीय

अमेरिका में दीवार का चक्कर

मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का मुद्दा अमेरिका में एक बड़ा विवाद बन चुका है। इस मुद्दे पर सरकारी कामकाज ठप्प है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के लिए कम से कम 5 बिलियन डॉलर यानी लगभग 36 हजार करोड़ रुपए का फण्ड रखा जाए। ट्रंप अमेरिका आने वाले अप्रवासियों को सबसे बड़ा खतरा मानते हैं और अप्रवासियों को रोकने के लिए वह मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के लिए अडिग हैं। अमेरिकी संसद ने पिछले दिनों केन्द्रीय एजैंसियों का कामकाज 8 फरवरी तक जारी रखने के लिए एक बिल पारित किया था लेकिन समझौते में अमेरिकी राष्ट्रपति की महत्वाकांक्षी दीवार के लिए फंडिंग का जिक्र नहीं था। इस पर ट्रंप के समर्थकों और कट्टर रिपब्लिक नेताओं ने इस पर नाराजगी जाहिर की।

इस पर राष्ट्रप​​ति ट्रंप इस बात पर अड़ गए कि इसमें दीवार के लिए फंडिंग भी शामिल की जाए, तभी वे इस पर हस्ताक्षर करेंगे। मौजूदा नियमों के मुताबिक खर्च सम्बन्धी विधेयकों को हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स बहुमत के साथ मंजूरी देता है। पहले सदन में ट्रंप का बहुमत था लेकिन अब जनवरी से डेमोक्रेट्स का बहुमत हो चुका है। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स दीवार के लिए 5.7 बिलियन डॉलर की फंडिंग को मंजूरी दे चुका है लेकिन खर्च सम्बन्धी विधेयक राष्ट्रपति तक पहुंचने तक सीनेट में भी इसका 60 वोटों से पास होना जरूरी है लेेकिन सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत से 9 सीटें कम हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वह संसद की मंजूरी के बिना मैक्सिको सीमा पर दीवार खड़ी करने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं।

अमेरिका में कामबंदी का दौर तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है और संघीय सरकार के 8 लाख कर्मचारी 22 दिसम्बर से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। ट्रंप कह रहे हैं कि वह इसे शटडाउन नहीं मानते क्योंकि वह इसे देश की सुरक्षा आैर इसके फायदे के लिए उठाया गया कदम कहेंगे लेकिन ट्रंप द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल लगाना इतना आसान भी नहीं है इसलिए लगता है कि शटडाउन कुछ महीनों के लिए खिंच सकता है। ऐसी स्थिति में सरकारी कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ेंगी और उनकी सरकार के प्रति नाराजगी भी बढ़ सकती है। अमेरिकी संसद की स्पीकर नेन्सी पेलोसी का कहना है कि सीमा पर दीवार बनाना अनैतिक है। सरकार को कभी न कभी तो समझौता करना ही होगा।

समस्या यह है कि मैक्सिको के वासी अमेरिका में घुस रहे हैं। मैक्सिको से लगी सीमा पर बाड़ लगाना कोई नया काम नहीं है। लगभग 1050 किलोमीटर सीमा पर बाड़ लगा दी गई तो इससे अप्रवासियों के लिए अमेरिका में दाखिल होना किसी जोखिम से कम नहीं। 1995 में मैक्सिको की सीमा पर अवरोध बनने शुरू हुए थे तब से अमेरिका में दाखिल होने की कोशिश कर रहे लगभग 7 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। 2009 के बाद से बिना कागजात अमेरिका आने वाले मैक्सिको के लोगों की संख्या में कमी आई है। ट्रंप अवैध घुसपैठ को रोकना चाहते हैं। वह इन्हेें अपने देश के लिए खतरा मानते हैं।

पिछले वर्ष नवम्बर में हजारों शरणार्थी मैक्सिको से अमेरिकी सीमा के पास पहंुच गए थे और अमेरिका से शरण मांग रहे थे तब डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें रोकने के लिए हजारों सैनिकों को सीमा पर तैनात कर दिया था और बार्डर पर कड़ी नाकेबंदी कर दी थी। इन शरणार्थियों में बड़ा हिस्सा होंडुरास से आए लोगों का था। मैक्सिको से लगने वाली सीमा पर दीवार बनाना ट्रंप का बड़ा चुनावी वादा था। उन्होंने यह भी कहा था कि दीवार का खर्च खुद मैक्सिको उठाएगा लेकिन मैक्सिको ने खर्च उठाने से इन्कार कर दिया। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 50 प्रतिशत लोग कामबंदी के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को जिम्मेदार मान रहे हैं जबकि 32 प्रतिशत लोग इसके लिए डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार मानते हैं। डेमोक्रेट्स की युवा प्रवासियों से जुड़ी ‘ड्रिकर्स’ की मांग है कि जो प्रवासी बचपन में ही अमेरिका में अवैध तरीके से आए थे, उन्हें प्रत्यर्पित नहीं किया जाए। ट्रंप की तरफ से यह मांग स्वीकार किए जाने के संकेत भी दिए गए थे लेकिन डेमोक्रेट्स ने दीवार की फंडिंग को मंजूरी देने से इन्कार कर दिया।

इसमें कोई संदेह नहीं कि अमेरिका में काफी संख्या में अवैध अप्रवासी हैं। ट्रंप ने जब अप्रवासी नीति का ऐलान कर कई देशों के लोगों के अमेरिका आगमन पर प्रतिबंध लगा ​दिया था तो लोगों ने उनके विरोध में प्रदर्शन किए थे। हालांकि अमेरिका की अदालतों ने इस नीति को खारिज कर ​दिया था। इस नीति के तहत अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुए लोगों के बच्चों को उनसे अलग किया जा रहा था। फैमिली डिटेंशन सेंटर खोले जा रहे थे। प्रवासी परिवार बिछुड़ गए थे। बाद में ट्रंप को नरम रुख अपनाना पड़ा था। ट्रंप ने अप्रवासियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अमेरिका की इन नीतियों से भारतीय समुदाय भी प्रभावित हुआ है।

ट्रंप की बेतुकी इमिग्रेशन नीतियों के चलते भारत और चीन के युवाओं के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया था। अब जाकर ट्रंप ने नरमी दिखाई है। अब ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि मैक्सिको से लगी सीमा पर कंक्रीट की बजाय स्टील का अवरोधक बनाने पर विचार कर रहे हैं। डेमोक्रेट सांसद भी सीमा पर कंक्रीट की दीवार को पसन्द नहीं करते, इसलिए वह भी स्टील का अवरोधक बनाने को तैयार दिखते हैं। अवैध प्रवासियों को रोकने के ​िलए एक अवरोधक की जरूरत तो है ही।