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जय श्रीराम...

इसमें कोई शक नहीं कि म​र्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम इस ब्रह्मांड पर एक सबसे बड़ी आध्यात्मिक आस्था है और इसीलिए कहा भी गया है कि रोम-रोम में राम लेकिन पिछले 30 साल की परिस्थितियों को अगर देखिये तो मैं समझती हूं कि श्रीराम एक बहुत बड़ी चुनौती हैं। यह बात इसलिए कह रही हूं कि उन्होंने अपना जीवन बेहद चुनौती भरे माहौल में जिया और इसीलिए उनकी जन्मस्थली अयोध्या में उनका मंदिर बनाने के लिए भारतीयों को इतना लम्बा इंतजार करना पड़ा।

खैर यह शुभ घड़ी अनेक विरोधों और सुप्रीम कोर्ट से गुजरते हुए आखिरकार आ ही गई है जब 5 तारीख को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी मंदिर के भूमि पूजन समारोह में ​शिरकत करेंगे। मेरा मानना है कि हमारी धार्मिक आस्था के लिए अलावा श्रीराम का मंदिर बनना आर्थिक दृष्टिकोण से भी एक खुशगवार पहलू है। अकेले अयोध्या में इस समय हजारों लोगों का रोजगार चल निकला है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि अर्थव्यवस्था के ​पटरी पर आने का रास्ता भी इसी मंदिर​निर्माण से होकर गुजरेगा। हजारों छोटे मजदूरों को वहां निर्माण कार्यों में रोजगार मिलेगा। छोटे-छोटे रेहड़ी पटरी वालों की आजीविका चल निकलेगी। लाखों पर्यटक जो अयोध्या में श्रीराम के दर्शन के लिए आएंगे उनके लिए  पिछले कई वर्षों से होटल, लांज वगैरह का कारोबार करने वाले लोगों को काफी मुश्किलें उठानी पड़ रही थी , अब सब कुछ ठीक हो जाएगा।

आज से तीस साल पहले का समय खुशहाल था। आज का वर्तमान समय कोरोना काल के नाम से जाना जा रहा है, जिसने जान-माल के नुक्सान के अलावा हमारी अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है। अब अयोध्या में मंदिर निर्माण सचमुच सम्भावनाओं के बड़े रास्ते खोल रहा है। जो लोग पूर्वांचल में विशेष रूप से अयोध्या को  पिछले कई वर्षों से छोड़-छोड़कर अपने-अपने राज्यों को जा रहे थे वे अब लौटकर अयोध्या आएंगे और पूर्वांचल का यह शहर अब रोजगार के  दृष्टिकोण से जाना जाएगा।

यह सच है कि अर्थव्यवस्था हर कोण से प्रभावित हुई है लेकिन अब अकेले अयोध्या और उसके आसपास के इलाकों में खाली मंदिर निर्माण कार्य के अलावा भी अन्य निर्माण कार्य खुलेंगे, जो कि हर किसी  के लिए नया अवसर लाएंगे। कभी इसी मंदिर निर्माण के लिए मैं अपने स्वर्गीय पति एवं पूर्व सांसद श्री अश्विनी कुमार को अक्सर लेखन कार्य के दौरान तनाव में देखा करती थी। वह चिंता भी करते थे लेिकन मंदिर निर्माण की उम्मीद को लेकर उनकी आंखें चमकने लगती थीं।

लेखनी अपनी धार पकड़ लेती थी और  फिर अनायास ही कहते कि देखना जिस दिन अयोध्या में राम मंदिर बनेगा उस दिन भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे टॉप पर होगी। यह सब यादें हैं, लेकिन इनमें अपार विश्वास और देश के विकास की सम्भावनाएं ​दिखाई दे रही हैं। आज मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन को लेकर एक लाख 11 हजार लड्डू बन रहे हैं। मंदिर की सीढि़यां लाल रंग से चमकेंगी।

सरयू के घाट चमकेंगे, उनका पुरुद्धार  होगा। मंदिर सजेगा और वहां लाखों शिलाएं लगेंगी तो यह सब निर्माण कार्य  मजदूर से लेकर व्यापारी तक, ढाबे से लेकर होटल तक हर किसी के लिए उम्मीदें ला रहा है। मेरा मानना है कि अयोध्या में पांच सितारा होटल बनने चाहिएं, वहीं  तीन सितारा और दो सितारा होटल भी हों तो धर्मशालाएं भी बनें। देश की मशहूर स्वदेशी वस्तुओं की मार्किट बने।

लाइट एंड साउंड कार्यक्रम का इंतजाम हो, पुरुष और महिला गाइड हों। मंदिर की सफाई आधुनिक तकनीक से हो, प्रसाद वितरण का सिस्टम भी टोकन के  माध्यम से हो। ऐसी स्वर्ग जैसी अनुभूति हो, देश-विदेश से लोग इसे देखने आएं या माथा टेकने आएं तो उनकी आस्था और विश्वास बढ़े और यह धार्मिक के साथ पर्यटक स्थल बने।

जैसे वैष्णो देवी ट्रस्ट है। वैसा ट्रस्ट हो, कोई पैसा दान करने के लिए तंग न करे, जैसे फिल्मों में अयोध्या नगरी स्वर्ग सी दिखती है, वैैसी हो। सुरक्षा की दृष्टि से बुजुर्गों और दिव्यांगों के दर्शन के लिए अलग से इंतजाम हो, शौचालय व्यवस्था भी पूरे शहर में उचित हो। इतना ही नहीं वाहन चालकों के लिए एक रिक्शा से लेकर आटो तक और लग्जरी कारों तक यातायात व्यवस्था भी सबके लिए उम्मीदें ला रही है।

श्रीराम का जिसने नाम लिया वह हमेशा-हमेशा के लिए तर गया। और इसे ही लेकर शिलाओं की हनुमान जी से जुड़े अनेक वृत्तांत रामायण में आपने पढ़े होेंगे। आज यह सब याद आ रहे हैं, अगर हम लॉकडाउन से पार पा चुके हैं, नाइट कर्फ्यू को ​पीछे छोड़ चुके हैं तो यह कोरोना भी कुछ समय का है और श्रीराम का मंदिर तो बन ही रहा है। श्रीराम का भव्य मंदिर हमें उस दीवाली की याद दिला रहा है जो श्रीराम जी के अयोध्या वापस आने से जुड़ी है। इसीलिए विश्व हिन्दू परिषद ने 5 अगस्त को हर किसी को अपने घर पर दीये जलाने का आह्वान किया है।

अयाेध्या से लेकर कश्मीर और कन्याकुमारी तक अब हर धंधे जोर पकड़ेंगे। मंदिर सबके लिए उम्मीदों का समय लाया है। इसके लिए श्रीराम जी की हम पर कृपा रहे ऐसी श्रीराम जी के चरणों में प्रार्थना है और ​िवश्वास है कि रात अब जा रही है और उजाला हो रहा है। देश और दुनिया को इसी का इंतजार है। श्रीराम मंदिर निर्माण से इकानामी काफी हद तक पटरी पर आएगी, यह तय है।