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ई-कामर्स कंपनियों पर शिकंजा

केन्द्र सरकार ने देश के छोटे और खुदरा व्यापारियों के हित में ई-कामर्स क्षेत्र में एफडीआई नीति में बदलाव करने की घोषणा की है और कुछ नए नियम भी तय किए हैं। नए नियम एक फरवरी, 2018 से लागू होंगे। ई-कामर्स प्लेटफार्म किसी सप्लायर को खास रियायत नहीं दे सकेंगे। ग्राहकों को पहले की तरह ई-कामर्स साइट्स पर बड़ा डिस्काउंट ​नहीं मिलेगा। किसी ई-कामर्स साइट पर कोई एक वेंडर कितना सामान बेच सकता है, इसकी भी सीमा तय की गई है। इन नए नियमों से एक्सक्लूसिव डील, कैशबैक आैर बम्पर डिस्काउंट जैसी चीजें खत्म हाे जाएंगी। नई नीति से ऐमेजान आैर फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। घरेलू कारोबारी काफी अर्से से ई-कामर्स कंपनियों के कामकाज से नाराज हैं और सरकार से मांग कर रहे थे कि ई-कामर्स कंपनियों पर शिकंजा कसा जाए। नए नियमों का मकसद इन प्लेटफार्मों को किसी भी तरह से पक्षपात से मुक्त करना है।

कलाउडटेल को ऐमेजान और डब्ल्यूएस रिटेल को फ्लिपकार्ट से जोड़कर देखा जाता है लेकिन नए नियमों की वजह से वे संबंधित प्लेटफार्म्स पर सामान नहीं बेच पाएगी। फ्लिपकार्ट की नई मालिक बालमार्ट खुद इस ई-कामर्स प्लेटफार्म पर सामान नहीं बेच पाएगी। ई-कामर्स प्लेटफार्म्स की सहयोगी इकाइयों की तरफ से डिस्काउंट को लेकर काफी शिकायतें मिल रही थीं वे लाजिसस्टिक्स आैर होलसेल एंटिटी के जरिए ये छूट दे रहे थे। व्यापारी समुदाय को यह शिकायत थी कि ई-कामर्स कंपनियां अपने प्लेटफार्मों पर सामान की बिक्री करके मार्किट को प्रभावित कर रही थी। यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों के खिलाफ भी था जिससे बिजनेस टू कंज्यूमर ई-कार्म्स में ऐसे निवेश पर रोक है। एक और बड़ा बदलाव इनवेंटरी संबंधी शर्तों को सख्त बना कर किया गया है। अगर कोई वेंडर मार्किट प्लेस एंटिटी या उसकी ग्रुप कंपनियों से 25 फीसदी से अधिक सामान खरीदता है तो माना जाएगा कि उसकी इनवेंटरी पर मार्किट प्लेस का कंट्रोल है। इसका अर्थ यही है कि कोई ब्रैंड या सप्लायर एक मार्किट प्लेस के साथ खास संबंध नहीं बना पाएगा।

व्यापारी संगठन और छोटे व खुदरा व्यापारी सरकार के इस फैसले से खुश हैं। उनका कहना है कि अगर नियमों और नई नीति को सही तरीके से लागू किया गया तो ई-कामर्स कंपनियों द्वारा गड़बड़ी, बाजार बिगाड़ने वाले मूल्य और भारी छूट पर लगाम लग सकेगी। ई-कामर्स कंपनियों के बंपर छूट आैर कैशबैक जैसे ऑफर से कई छोटे कारोबारियों का मुनाफा आधा हो गया और उनके अपने वजूद को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। 2014 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विदेशी कंपनियों के खुदरा बाजार में आने से रोक लगाने आैर घरेलू छोटे कारोबारियों के संरक्षण का वादा किया था। देश का खुदरा बाजार बहुत बड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक देश में लगभग 4 करोड़ खुदरा दुकानें हैं। इनके माध्यम से लगभग 14 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है।

आनलाइन कंपनियों पर कोई लगाम नहीं लगाए जाने से कारोबारी चिन्तित थे। सरकार ने जीएसटी की दरें घटाकर उन्हें मनाने का काम किया है। नए नियमों से बड़ी कंपनियों को झटका लगा है। इनके पास पांच हजार करोड़ से भी ज्यादा का स्टाक पड़ा हुआ है। अब इन कंपनियों को अपना स्टाक एक फरवरी को खत्म करना होगा। अब ऐसे व्यापारी अपना सामान इन प्लेटफार्मों पर नहीं बेच पाएंगे जिन्होंने कंपनी में हिस्सेदारी भी खरीद रखी है।

दूसरी तरफ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी ई-कामर्स कंपनियों के लिए नियम सख्त करने से लम्बे समय में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और उपभोक्ताओं पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उनका मानना है कि नियमों में बदलाव भारतीय उपभोक्ताओं के हित में नहीं। एक तरफ भारत सरकार सौ अरब डालर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाने की बात करती है तो दूसरी तरफ नए नियम बना देती है, इससे विदेशी कंपनियों को गलत संदेश जाएगा। इससे निश्चित रूप से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश घट सकता है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ई-कामर्स कंपनियों के लिए बनाए गए सख्त नियमों का इस क्षेत्र पर कोई ज्यादा असर नहीं होगा।

इससे न तो आनलाइन बाजार की गति पर विशेष असर पड़ेगा और न ही कंपनियां हतोत्साहित होंगी, क्योंकि यह प्लेटफार्म विक्रेता आैर खरीदार दोनों के लिए सहूलियत उपलब्ध कराता है। ई-कामर्स प्लेटफार्म पर निष्पक्ष कारोबार और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है। अगर निवेशक नए मानकों के डर से पीछे हटते हैं तो यह न देश के लिए अच्छा होगा और न ही निवेशकों के लिए।

आनलाइन बाजार इतना लोकप्रिय हो चुका है कि लोग घर बैठे खरीदारी करने के ज्यादा इच्छुक दिखाई देते हैं। चाहे किसी को भुगतान करना हो, पसंदीदा रेस्तरां से व्यंजन मंगाना हो, कोई सामान खरीदना हो तो सब-कुछ चु​टकियों में हो जाता है। इसलिए यह कहना मुश्किल होगा कि ई-कामर्स कंपनियों का व्यापार प्रभावित होगा। नए नियम लागू होने से देश के छोटे खुदरा व्यापारियों को लाभ पहुंचेगा या नहीं, इसके लिए इसे इंतजार करना होगा क्योंकि बाजार के बड़े खिलाड़ी अपने लिए कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं प्रभावित होता है तो छोटा दुकानदार।