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​दिल्ली पुलिस कमिश्नर का संज्ञान लेने के लिए धन्यवाद

बच्चे किसी के भी हों, कोई भी गलत काम करें, चाहे किसी मजबूरी या जरूरत रहते उन्हें देख पीड़ा होती है। कोई भी रेलवे स्टेशन हो या बस अड्डा या फिर दिल्ली शहर के चौराहों पर जैसे ही लाल बत्ती होती है वाहनों के दरवाजे और खिड़कियों पर ठक-ठक की आवाज हाथ फैलाते हुए बच्चे, औरतें और युवतियां तथा बुजुर्ग यह सब के सब लोग भीख की गुहार लगा रहे होते हैं। दिल्ली की रेडलाइट पर यह दृश्य जो कभी-कभी किसी फिल्म की कल्पना लगते थे अब ​रील लाइफ से रियल लाइफ में हर रोज दिखाई देते हैं। कानूनन ​भीख मांगना अपराध है परन्तु दिल्ली में चौराहों पर जिस तरह से भीख की गुहार हाथ फैलाकर की जा रही है सचमुच दयनीय है और एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर रही है। इस हकीकत का अगला मोड़ दिल्ली का कोई भी म​ंदिर ले लीजिए। कनाट प्लेस का हनुमान मंदिर हो या यमुना बाजार का हनुमान मंदिर हो। संतोषी माता मंदिर हो या झंडेवालान मंदिर हो, हर तरफ मंदिरों के बाहर आपके नाम ढेरों दुआएं लौटाकर चंद पैसों की मांग भीख को दिल्ली में इस कद्र आम बना चुके हैं कि सचमुच सवाल खड़े हो रहे हैं, क्या आखिर हाथ फैलाने वाले यह बच्चे या महिलाएं या बुजुर्ग या युवतियां या फिर ये ​विकलांग लोग कौन हैं? 

मैं यहां जगमोहन जी का जिक्र करना चाहूंगी जो जम्मू-कश्मीर के गर्वनर थे, अपने ट्रस्टियों के साथ मिलकर  उस समय वैष्णो देवी के ट्रस्टी, ​जिसमें अश्विनी जी भी थे तो वैष्णो देवी माता का सारा सिस्टम ही ठीक कर दिया। अब वहां कोई भीख नहीं मांगता, आपको कोई तंग नहीं करता। ऐसे ही सभी मंदिर, गुरुद्वारों के बाहर होना चाहिए।

इस मामले पर दिल्ली पुलिस के कमिश्नर राकेश अस्थाना तक बात पहुंची है और दिल्ली पुलिस सक्रिय हो गई है। पता लगाया जा रहा है कि आखिरकार इतने बड़े पैमाने पर ​भीख मांगने के पीछे अगर बच्चों की बात की जाए तो कहीं ऐसी मंशा के पीछे कोई गैंग तो काम नहीं कर रहा? या यह जरूरत, गरीबी के कारण मांग रहे हैं, जिनके परिवारों में जहां बच्चे पैदा करने की कोई सीमा नहीं होती उन्हें लोग गलियों में छोड़ देते हैं। बच्चे गायब हो रहे हैं और यह बच्चे जो 5 से 10 साल की उम्र के हैं बड़ी ही दया के साथ भीख की गुहार हर लालबत्ती पर लोगों के सामने लगा देते हैं, तो क्या कहीं कोई गैंग इनसे यह धंधा तो नहीं करवा रहा है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोग अपने धारणाएं शेयर करते हैं। दिल्ली पुलिस समय-समय पर अभियान भी चलाती रहती है और बच्चों से भीख मंगवाने की आड़ में गिरोहों की सक्रियता को लेकर राजधानी वासियों को समय-समय पर अलर्ट भी करती रही है। लालबत्तियों पर ​किसी भी वाहन के दरवाजे या खिड़की पर अगर ठक-ठक होती है तो बच्चे भीख की आड़ में ध्यान भटका सकते हैं और गैंग के लोग कार का दरवाजा या शीश तोड़कर समान लेकर चम्पत हो जाते हैं। ऑन द रिकार्ड दिल्ली पुलिस ने इसे ठक-ठक गिरोह का नाम ​दिया है।

 दिल्ली के ऐसे ​कितने ही फ्लाईआेवर हैं जिनके नीचे इन लोगों के रहने-सहने के ठिकाने बन चुके हैं। कभी गुब्बारे बेचना तो कभी फूल बेचना आैर कभी जिम्नास्ट के खेल दिखाकर पैसे की मांग करना यह सब काम बच्चे ही कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में यह काम बच्चों से करवाये जा रहे हैं। कितनी ही युवतियां गोदी में बच्चे को पकड़कर अर्द्धग्न ​लिवास में लोगों से भीख मांग रही हैं। लोगों की कुशलता की मंगलकामना करने वाले कितने ही किन्नर सड़कों पर सक्रिय हैं। आखिरकार सड़कों पर इतनी सक्रियता कैसे और क्यों बढ़ गई है, ऐसे सवाल अक्सर लोग एक-दूसरे से पूछ रहे हैं। मंदिरों के बाहर भी ऐसे ही दृश्य देखने को​ मिलते हैं। आखिरकार इतने बड़े पैमाने पर भीख का चलन किसी अनिष्ठ की ओर संकेत कर रहा है। भीख पर नियंत्रण लगाया जाना चाहिए। अगर इसके पीछे सुनिश्चित तरीके से अपराध चल रहा है तो यह लोग कौन हैं, इसका भी पता लगाकर उन पर एक्शन लिया जाना चाहिए।

दिल्ली में हर रोज आैसतन 15 से 20 बच्चे गुम होते हैं। इतनी रिपोर्ट थाने में कराई जाती है। इनकी तलाश के लिए दिल्ली पुलिस का आपरेशन मिलाप भी चल रहा है लेकिन बच्चों की गुमशुदी के पीछे भी किसी गैंग की आशंका हो सकती है। इसका भी पता लगाया जाना बहुत जरूरी है। भावनाओं में बहकर लोग दान के रूप में भीख दे सकते हैं परन्तु फिर वही बात कि इसका पता लगाना जरूरी है कि दिल्ली में भीख का चलन इतने बड़े पैमाने पर क्यों जा पहुंचा है। यूं तो संत क​बीर ने भी कहा है-

‘‘मांगन मरण समान है, मत मांगो कोई भीख।

मांगन से मरना भला, यही सतगुरु की सीख।’’

लेकिन मांगने वाले पढ़े-लिखे और अनपढ़ दोनों हैं।​ दिल्ली के साफ-सुथरे दामन पर भीख एक बदनुमा दाग है। उम्मीद की जानी चाहिए कि भीख पर नियंत्रण होना चाहिए।