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संपादकीय

कंगाल पाकिस्तान की सेना का सच

जिस मुल्क का गरीबी खत्म करने का एक ही तरीका है अल्युमीनियम का वही 72 वर्ष पुराना कटोरा जो जिन्ना ने इन्हें प्रदान किया था, उसे काफी वर्षों तक अमेरिका के समक्ष फैलाए रखा, अमेरिका से सम्बन्धों में कड़वाहट आई तो कटोरा अरब जगत और चीन के सामने रख दिया। अब यही कटोरा दुनिया के बैंकों के सामने रखा हुआ है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत काफी खस्ता हो चुकी है। ईद के दिन यह खबर आई कि पाकिस्तानी सेना स्वेच्छा से अपना बजट कम करने काे तैयार है। वह अपने तीनों अंगों यानी थलसेना, नौसेना और वायुसेना के खर्चों में कटौती करेगी। 

देश की अर्थव्यवस्था को सम्भालने के लिए क्रिकेटर से सियासतदां बने इमरान खान सरकार के खर्चों को घटाने की कोशिश में लगे हैं। पाकिस्तान का अगले वित्तीय वर्ष में अनुमानित रक्षा बजट एक लाख 27 हजार करोड़ रुपए का है। इसमें पूर्व सैनिकों की पैंशन और विशेष अन्य पैकेज भी शामिल हैं। 2018 में पाकिस्तान हथियारों पर खर्च करने वाला 20वां सबसे बड़ा देश था। उसने जो पैसा हथियारों पर खर्च किया वह उसकी जीडीपी के 4 प्रतिशत के बराबर था।

पाकिस्तान अपने वार्षिक बजट का 18 फीसदी से ज्यादा पैसा रक्षा पर खर्च करता है। दुनिया में जिन देशों ने प्रगति की है, उनमें शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज्यादा धन खर्च किया जाता रहा है लेकिन पाकिस्तान में हुआ इसके विपरीत। वहां तो निरक्षरता दूर करने के लिए मदरसों में ऐसी पढ़ाई कराई गई कि मासूम से मासूम बालक भी जेहादी बनने को मजबूर हो जाए। पाकिस्तान की हालत के लिए उसकी भारत विरोधी नीतियां ही जिम्मेदार हैं। उसने देश विभाजन के बाद से ही भारत के विरुद्ध एक साथ कई मोर्चों पर घोषित और अघोषित युद्ध छेड़ दिया था। 

जो लोग अपने मुल्क के सगे नहीं, अपने ही धर्म को मानने वालों के प्रति सच्चे नहीं, पीठ में छुरा भोंकना ही जिनकी प्रवृत्ति है, जिनके 90 हजार सैनिकों की कमर में रस्सा लगाकर कभी हमने अपनी सड़कों पर घुमाया था और जो कुरान शरीफ की कसमें खाकर बोलते थे- ‘‘अल्लाह पाक की कसम, हमारी नस्लें भी कभी हिन्द की तरफ आंख उठाकर नहीं देखेंगी।’’ उन लोगों ने हमें आज तक चैन से नहीं बैठने दिया। हमारी संसद पर आक्रमण किया, हमारे धर्मस्थानों को भी नहीं छोड़ा। तीन युद्धों में पराजित होने के बावजूद कारगिल में घुसपैठ कराकर हमें अपनी ही धरती पर युद्ध लड़ने को मजबूर किया। मुम्बई पर आतंकवादी हमला करवाया और देश के गरीब बेरोजगार युवाओं को जेहादी बनाकर भेजा। भारत आज तक कश्मीर में आतंकवाद का छद्म युद्ध झेल रहा है। 

पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के भेजे गए धन से स्कूली बच्चों तक पत्थरबाज बना दिए गए। यह कैसा जेहाद है जो अपनी ही कौम को मरवा रहा है। जिनके हाथों में कम्प्यूटर होना चाहिए था, उनके हाथों में बंदूकें थमा दी गईं। पाकिस्तान की सेना के जरनैलों ने रक्षा बजट में लगातार बढ़ौतरी कर अपने ही देश को लूटा और कई बार पाकिस्तान के लोकतंत्र को अपने बूटों तले रौंदा है। जो भी सत्ता में आया वह सेना की कठपुतली बना रहा। कठपुतलियों ने भी सेना का साथ लेकर विदेशों में जमकर सम्पत्ति बनाई।

मुझे हैरानी हुई कि पाकिस्तानी सेना के स्वेच्छा से रक्षा बजट घटाने की पाक सोशल मीडिया पर तारीफ क्यों हो रही है। क्या पाक का अवाम नहीं जानता कि उसकी दुर्दशा के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं बल्कि सेना ही जिम्मेदार है। स्वतंत्र देश बनने के बाद आखिर पाकिस्तान को खतरा किस देश से था? उसे किसी देश से खतरा नहीं था लेकिन पाकिस्तान के राजनीतिज्ञों ने भारत को खतरा बताकर, कश्मीर को कोर इश्यू बताकर अपनी सियासत चमकाई। पाकिस्तान में आतंकवाद का मूल कारण निरक्षरता, गरीबी और आपसी विवाद है। पाक के हुक्मरान तो पहले अमेरिका के पालू रहे हैं, अब चीन के पालू हैं। जितना उसने भारत, अफगानिस्तान में आतंकवाद फैलाने पर खर्च किया है, काश! उसने वह पैसा खुद को संयुक्त अरब अमीरात की तरह आधुनिक बनाने के लिए खर्च किया होता तो तस्वीर कुछ अलग होती।

पाकिस्तान का शिक्षा बजट उसके कुल बजट का सिर्फ दो प्रतिशत है। कुल बजट में स्वास्थ्य पर खर्च एक फीसदी से भी कम है। उसने लगातार आतंकवाद की खेती की है। पाकिस्तान सेना का बजट कम करने के ऐलान के पीछे सच्चाई कुछ और भी है। पिछले महीने पाकिस्तान ने कर्ज के लि​ए अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष से समझौता किया तो कोष ने कड़ी शर्तें रखीं। उन शर्तों में खर्च में कटौती करना भी एक है। पाकिस्तान की सेना को मजबूर होकर रक्षा बजट में कटौती का ऐलान करना पड़ा। भारत ने भी पाकिस्तान से व्यापार लगभग बन्द कर दिया है। पाकिस्तान से तरजीही राष्ट्र का दर्जा वापस ले लिया है। अमेरिका ने भी सहायता बन्द कर दी है। मोदी सरकार की आक्रामक कूटनीति भी रंग ला रही है। देखना होगा कि इमरान खान पाकिस्तान के अस्तित्व की रक्षा कैसे कर पाते हैं।