सीबीआई ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील बोफोर्स तोप सौदा दलाली मामले में आगे जांच की अनुमति के लिये दायर अर्जी गुरुवार को दिल्ली की कोर्ट से वापस ले ली। मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नवीन कुमार कश्यप को सीबीआई ने बताया कि जांच एजेंसी एक फरवरी 2018 को दायर अपनी अर्जी वापस लेना चाहती है।

सीबीआई ने मामले में आगे की जांच कर अनुमति के लिये निचली कोर्ट तके अर्जी दायर की थी। सीबीआई ने कहा था कि मामले में उसे नयी सामग्री और सबूत मिले हैं। जांच एजेंसी ने गुरुवार को कोर्ट को बताया कि वह आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय लेगी परंतु इस समय वह अपनी अर्जी वापस लेना चाहती है।

सीबीआई के बदले हुए रुख पर गौर करते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इसका कारण तो सीबीआई ही बेहतर जानती है, मामले में वह अपनी अर्जी वापस लेना चाहती है, ऐसा करने का उन्हें अधिकार है क्योंकि वे आवेदक हैं।’’ कोर्ट ने चार दिसंबर 2018 को पूछा था कि आखिर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को मामले में आगे की जांच के लिये उसकी अनुमति की जरूरत क्यों है।

सीबीआई ने मामले में सभी आरोपियों को आरोपमुक्त करने के 31 मई 2005 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दो फरवरी, 2018 को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने दो नवंबर 2018 को मामले में सीबीआई की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें उसने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने में 13 साल की देरी पर माफी मांगी थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अपील दायर करने में 4,500 दिनों की देरी को लेकर माफी के संबंध में सीबीआई के जवाब से वह संतुष्ट नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में अब भी एक अपील पर सुनवाई चल रही है, जिसमें जांच एजेंसी एक प्रतिवादी है। सुप्रीम कोर्ट ने दो नवंबर, 2018 को कहा था कि मामले में जांच एजेंसी प्रतिवादी के तौर पर सहायता कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई मामले में वकील अजय अग्रवाल की ओर से दायर याचिका पर हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी बुनियादी बातों को उठा सकती है। अग्रवाल ने इस फैसले को चुनौती भी दी थी। उत्तर प्रदेश के रायबरेली से लोकसभा का टिकट नहीं दिये जाने के कारण अग्रवाल इस समय बीजेपी के बागी नेता बने हुए हैं। सीबीआई द्वारा 90 दिन की अनिवार्य अवधि में अपील दायर नहीं करने पर उन्होंने 2005 में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।