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केंद्र सरकार की नई पहल, अब पूरे देश में ऑनलाइन होगा किसानों को MSP का भुगतान

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ जहां एक ओर पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे है, तो वहीं दूसरी तरफ, केंद्र की मोदी सरकार ने अब किसानों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को आदेश जारी किया है कि पूरे देश के किसानों को अब ऑनलाइन माध्यम से ही एमएसपी का भुगतान किया जाएगा। सरकार ने फसलों की सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाने और किसानों को बिचैलियों के जाल से आजाद कराने के लिए एमएसपी का भुगतान सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक मोड से लागू करने जा रही है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा को भी अगले सीजन से किसानों को ऑनलाइन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर करीब तीन महीने से डेरा डाले किसानों में बहुसंख्यक पंजाब और हरियाणा के हैं और सूत्र बताते हैं कि दोनों प्रदेशों में किसान आंदोलन को मंडियों के आढ़तियों का समर्थन प्राप्त है। जाहिर है कि पंजाब और हरियाणा में गेहूं और धान की सरकारी खरीद में मंडियों के आढ़तियों का काफी दबदबा रहता है। सरकारी एजेंसियां दोनों प्रदेशों में आढ़तियों के जरिए ही किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल खरीदती हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें अलग से कमीशन मिलता है फिर भी आढ़ती चाहते हैं कि किसानों को जो भुगतान होता है वह उन्हीं के जरिए हो। मगर सरकार अब यह सुनिश्चित करने जा रही है कि एमएसपी पर होने वाली खरीद के लिए किसानों को सीधे उनके खाते में ही भुगतान हो। इसलिए, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने पंजाब और हरियाणा को एमएसपी का ऑनलाइन भुगतान अगले सीजन से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

उत्तर प्रदेश के एक आढ़ती ने बताया कि पंजाब और हरियाणा में एमएसपी का भुगतान अगर, सभी किसानों को ऑनलाइन होने लगेगा तो वहां खरीद में जो धांधली होती है वह रूक जाएगी। किस तरह की धांधली होती है। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि दूसरे प्रदेशों का अनाज हरियाणा और पंजाब में बिकता है। मगर, जब किसानों का रजिस्ट्रेशन होगा तो सिर्फ उसी प्रदेश के किसानों का अनाज बिकेगा। इससे आढ़तियों का दबदबा भी कम होगा।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक दिन पहले गुरुवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान आईएएनएस के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि फसलों की खरीद से लेकर पीडीएस के लाभार्थियों को सस्ता अनाज वितरण करने तक हर स्तर पर डिजिटलीकरण करके पारदर्शिता लाने की कोशिश की जा रही है। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित इस प्रेसवार्ता में केंद्रीय मंत्री गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत पीडीएस के लाभार्थियों को किफायती दरों पर दिए जा रहे अनाजों के दाम में बढ़ोतरी का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।

मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में फसलों की सरकारी खरीद में किसानों की बायोमेट्रिक पहचान शुरू की गई है जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। मंत्रालय ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (सीडब्ल्यूसी) के एसेट्स के मॉनिटाइजेशन से वेयरहाउसिंग और भंडारण के इन्फ्रास्ट्रक्च र के आधुनिकीकरण में काफी निवेश होगा।