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कांग्रेस ने 370 पर दोहराया रुख, सरकार के कदम को ‘संवैधानिक अनैतिकता’ बताया

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के कई प्रावधान हटाए जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटे जाने के कदम पर अपना रुख दोहराते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि सरकार ने इस मामले में ‘संवैधानिक अनैतिकता’ की है। पार्टी महासचिवों, प्रदेश अध्यक्षों, विधायक दल के नेताओं, विभाग प्रमुखों और सांसदों की बैठक में राहुल गांधी, पी चिदंबरम और गुलाम नबी आजाद ने पिछले दिनों कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में पारित प्रस्ताव का उल्लेख किया और कहा कि हमें जनता के बीच अपने रुख को स्पष्ट तौर पर रखना है। 

सीडब्ल्यूसी ने मंगलवार की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा था कि वह राज्य के लोगों के साथ खड़ी रहेगी और भाजपा के ''विभाजनकारी एजेंडे'' के खिलाफ लड़ेगी। कार्य समिति ने बैठक में प्रस्ताव पारित कर सरकार के कदम को मनमाना और अलोकतांत्रिक करार देते हुए यह भी कहा था कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और पीओके तथा चीन के अधीन का एक भूभाग भी भारत का अभिन्न हिस्सा है। 

कांग्रेस पदाधिकारियों की शुक्रवार को हुई बैठक में आजाद ने जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ विलय के इतिहास के बारे में बताया और यह समझाया कि पार्टी ने सरकार के कदम के विरोध में यह कदम क्यों उठाया है। बैठक में पूर्वोत्तर के एक नेता ने यह कहा कि जम्मू-कश्मीर में सरकार के फैसले के बाद से पूर्वोत्तर के राज्यों में ऐसी आशंका फैल गई है कि केंद्र सरकार भविष्य में उनके विशेष अधिकारों को खत्म कर सकती है। 

यह बैठक उस वक्त हुई है जब पार्टी के कई नेता अनुच्छेद 370 पर सरकार के कदम का खुलकर समर्थन कर चुके हैं। इसमें प्रमुख नाम वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्या सिंधिया का है। सिंधिया ने सरकार के कदम का समर्थन करते हुए मंगलवार को कहा कि यह राष्ट्रहित में लिया गया निर्णय है। 

वैसे, सिंधिया से पहले दीपेंद्र हुड्डा, मिलिंद देवड़ा, अनिल शास्त्री, रंजीत रंजन और अदिति सिंह सहित पार्टी के कई नेता जम्मू-कश्मीर पर उठाए गए नरेंद्र मोदी सरकार के कदम का समर्थन कर चुके हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस का आधिकारिक रुख इस कदम के विरोध में है। उसका आरोप है कि सरकार ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है। पार्टी ने संसद में विधेयक का विरोध किया है। 

गौरतलब है कि संसद ने मंगलवार को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा संबंधी अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने के प्रस्ताव संबंधी संकल्प और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी।