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कांग्रेस ने बीजेपी और RSS को बताया दलित-पिछड़ा विरोधी

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ‘‘आरक्षण पर सौहार्द्रपूर्ण माहौल में चर्चा’’ संबंधी टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को बीजेपी एवं संघ को 'दलित-पिछड़ा विरोधी'' करार दिया और आरोप लगाया कि आरक्षण और संविधान इनके निशाने पर है तथा यही इनका ‘‘असली एजेंडा’’ है। 

पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने यह भी दावा किया कि भागवत के बयान का मकसद विवाद खड़ा करके लोगों का ध्यान भटकाना है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''बीजेपी और आरएसएस की आदत बन गयी है कि जनता को विवादों के जरिये व्यस्त रखें ताकि लोग कठिन प्रश्न पूछना बन्द कर दें और बुनियादी मुद्दे नहीं उठें।'' 

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की खराब स्थिति पर सवाल पूछने लगे तो मोहन भागवत का यह बयान आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पी एल पुनिया ने आरोप लगाया, ''बीजेपी जब भी सरकार में आई तो संविधान में बदलाव की कोशिश की गई। भागवत का बयान आया है कि आरक्षण पर सद्भावपूर्ण बहस होनी चहिए। ये लोग किस तरह की बहस करना चाहते हैं? ''

उन्होंने कहा, ''यह सोची समझी चाल है। उनकी मानसिकता आरक्षण खत्म करने की है। क्या यह सही नहीं है कि इन लोगों ने शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण खत्म करने की कोशिश नहीं की ?'' पूनिया ने कहा, '' भूमि उपयोग को गलत दिखाकर दिल्ली में रविदास मंदिर को ढहा दिया गया।'' 

उन्होंने आरोप लगाया, '' बीजेपी और आरएसएस दलित विरोधी हैं। ये लोग दलितों और ओबीसी को मिल रहे लाभ को खत्म करना चाहते हैं।'' कांग्रेस नेता उदित राज ने दावा किया, ''यह बयान दिखाता है कि ये लोग पुरानी मानसिकता में हैं। ये लोग शुरू से ही संविधान और आरक्षण के विरोधी हैं। 

भागवत के जरिए लोगों भड़काने की कोशिश की गई है। समाज में लोगों को लड़ाने की कोशिश की गई है।'' उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को भी समझना होगा कि ये लोग आरक्षण खत्म करना चाहते हैं और वे भी इनके निशाने पर हैं। इससे पहले भावगत के बयान से जुड़ी खबर ट्विटर पर शेयर करते हुए कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया, ‘‘ग़रीबों के अधिकारों पर हमला, संविधान सम्मत अधिकारों को कुचलना, दलितों-पिछड़ों के अधिकार छीनना... यही असली भाजपाई एजेंडा है।’’ 

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ-बीजेपी का दलित-पिछड़ा विरोधी चेहरा उजागर हुआ। ग़रीबों के आरक्षण को ख़त्म करने का षड्यंत्र और संविधान बदलने की उनकी अगली नीति बेनक़ाब हुई।’’ गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कथित तौर पर कहा था कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं और जो इसके खिलाफ हैं उन लोगों के बीच इस पर सौहार्द्रपूर्ण माहौल में बातचीत होनी चाहिए। 

भागवत ने कहा कि उन्होंने पहले भी आरक्षण पर बात की थी लेकिन इससे काफी हंगामा मचा और पूरी चर्चा वास्तविक मुद्दे से भटक गई। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में यह भी कहा कहा कि आरक्षण का पक्ष लेने वालों को उन लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए जो इसके खिलाफ हैं और इसी तरह से इसका विरोध करने वालों को इसका समर्थन करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए।