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विशेषज्ञ का दावा- 'ओमीक्रॉन' वेरिएंट से मरने की आशंका कम, जानें किन अहम कदमों को उठाने की जरूरत

भारत में ओमीक्रॉन वेरिएंट के 2 मामलों की पुष्टि होने के बाद से ही देशभर में हड़कंप मच गया है, केंद्र और राज्य सरकारें हरकत में आ गयी है और संक्रमण को रोकने के लिए कई दिशानिर्देशों को जारी किया गया है। बता दें कि गिरगिट की  तरह रंग बदल रहे कोरोना वायरस का ओमीक्रॉन स्वरुप बाकी वेरिएंट से ज्यादा संक्रामक और खतरनाक माना जा रहा है। ऐसे में आइये जानते हैं हमे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए किन महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।     

जानें क्या है ओमीक्रॉन वेरिएंट से निपटने का तरीका 

महाराष्ट्र सरकार के कोविड-19 टास्क फोर्स के एक सदस्य ने बताया कि सतर्कता, जीनोम सिक्वेंसिंग, सीमा निगरानी में सुधार और टीकाकरण कुछ ऐसी चीजें हैं जो कोरोना वायरस के नए स्वरूप ‘ओमीक्रॉन’ वेरिएंट से निपटने के लिए आवश्यक हैं। कार्यबल के सदस्य एवं शहर के एक अस्पताल में संक्रामक रोगों के सलाहकार डॉ. वसंत नागवेकर ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि हालांकि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन ‘ओमीक्रॉन’ चिंता का विषय जरूर है।

बेहद सतर्कता बरतने की है जरूरत 

उन्होंने कहा, ‘‘ हमें सतर्क रहने की जरूरत है। इस नए स्वरूप में 50 उत्परिवर्तन हुए हैं और इसने बहुत चिंता उत्पन्न की है। यह अधिक संक्रामक और प्रतिरक्षा-निरोधक भी हो सकता है। लेकिन अभी तक, इसके काई सबूत नहीं मिले हैं कि यह अधिक घातक संक्रमण है। दक्षिण अफ्रीका से मिले प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार अधिकतर युवा इसकी चपेट में आए हैं और इस स्वरूप के लक्षण मामूली हैं।’’

विशेषज्ञ का दावा- ओमीक्रॉन की चपेट में आने से मौत होने की आशंका कम

डॉ. नागवेकर ने कहा कि अभी के लिए स्वरूप स्थिर प्रतीत होता है, अधिक संक्रामकता के साथ, कम घातक...जिससे संभवत: इससे संक्रमित होने पर लोगों को अधिक संख्या में अस्पताल में भर्ती कराने या इसकी चपेट में आने से मौत होने की आशंका कम है।

उन्होंने लोगों से मास्क पहनने की अपील करते हुए कहा,‘‘ हमें सतर्कता, जीनोम अनुक्रमण, सीमा निगरानी में सुधार और टीकाकरण बढ़ाने की जरूरत है।’’ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में पहचाने गए कोरोना वायरस के इस नए स्वरूप ‘ओमीक्रोन’ को ‘‘ चिंता का स्वरूप’’ बताया है।

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