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कालाधन के खिलाफ मुहिम में तेजी लाएगी सरकार : राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने मध्यम वर्ग के लाभ के लिये रियल एस्टेट क्षेत्र में काला धन सृजन पर अंकुश लगाने को लेकर कई कदम उठाये हैं और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत गलत तरीके से कमाये गये धन के खिलाफ मुहिम तेज की जाएगी। 

कोविंद ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने कालाधान पर अंकुश लगाने के लिये जो कदम उठाये हैं, उसमें 3.50 लाख संदिग्ध कंपनियों का पंजीकरण रद्द करना तथा विभिन्न देशों के साथ स्वत: वित्तीय सूचना आदान-प्रदान समझौतों पर हस्ताक्षर शामिल हैं। 

उन्होंने कहा, "मेरी सरकार, भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करने की अपनी कड़ी नीति को और व्यापक तथा प्रभावी बनाएगी। सार्वजनिक जीवन और सरकारी सेवाओं से भ्रष्टाचार को समाप्त करने का अभियान और तेज किया जाएगा।" 

राष्ट्रपति ने कहा, "काले धन के खिलाफ शुरू की गई मुहिम को और तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा। पिछले 2 वर्ष में कंपनियों के 4 लाख 25 हज़ार निदेशकों को अयोग्य घोषित किया गया है और 3 लाख 50 हज़ार संदिग्ध कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है।" 

कोविंद ने कहा कि वैश्विक समुदाय भी काला धन सृजन करने पर अंकुश लगाने की कार्रवाई को लेकर भारत की स्थिति का समर्थन कर रहा है। रीयल एस्टेट क्षेत्र का जिक्र करते हुए कोविंद ने कहा कि जमीन-जायदाद के क्षेत्र में काले धन के लेनदेन को रोकने और ग्राहकों के हित की रक्षा में ‘रीयल एस्टेट नियमन कानून’ (रेरा) का प्रभाव दिखाई दे रहा है। इससे मध्यम वर्ग के परिवारों को बहुत राहत मिल रही है। 

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध करके भाग जाने वालों पर नियंत्रण करने में भगोड़ा और आर्थिक अपराध कानून उपयोगी सिद्ध हो रहा है। कोविंद ने कहा, "अब हमें इस संदर्भ में 146 देशों से जानकारी प्राप्त हो रही है जिसमें स्विटजरलैंड भी शामिल है। इनमें से 80 देश ऐसे हैं जिनसे हमारा सूचना के स्वत: आदान-प्रदान करने का भी समझौता हुआ है। जिन लोगों ने विदेश में काला धन इकट्ठा किया है, अब हमें उन सबकी जानकारी प्राप्त हो रही है।" 

संसद ने कानून से बचने के लिये देश छोड़कर बाहर जाने वाले आर्थिक अपराधियों पर लगाम लगाने को लेकर पिछले साल अगस्त में कानून बनाया। उन्होंने यह भी कहा, "ऋण शोधन अक्षमता और दिवाला संहिता देश के सबसे बड़े और सबसे प्रभावी आर्थिक सुधारों में से एक है। इस संहिता के अमल में आने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों की साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि का निपटारा हुआ है। इस संहिता से बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से लिया हुआ कर्ज न चुकाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया है।" 

राष्ट्रपति ने कहा, "सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिये न्यूनतम सरकार-कारगर शासन पर और अधिक बल देगी। साथ ही मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिये प्रौद्योगिकी के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा देगी। लोकपाल की नियुक्ति से भी,पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।"