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देश

भारत ने किया रिसैट-2बी का प्रक्षेपण, घने बादलों के बावजूद भी ले सकेगा पृथ्वी की तस्वीरें

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पृथ्वी की निगरानी करने वाले उपग्रह रिसैट-2 बी को बुधवार को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में पहुंचा दिया। यह उपग्रह घने बादलों के बावजूद भी पृथ्वी की तस्वीरें ले सकेगा और इसके जरिए सीमा पार पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर निगरानी रखी जा सकेगी। साथ ही, इसने सैन्य एवं असैन्य क्षेत्रों में देश की निगरानी क्षमताओं को भी बढ़ाया है। ‘जासूस’ उपग्रह बताए जा रहे रिसैट-2 बी (रडार इमेजिंग सैटेलाइट-2बी) अपने पूर्ववर्ती रिसैट-2 का स्थान लेगा।

उल्लेखनीय है कि आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने के लिए सीमा पार आतंकी ठिकानों में गतिविधियों की निगरानी करने में भारत ने रिसैट-2 का सक्रियता से उपयोग किया है। उस उपग्रह को 2009 में प्रक्षेपित किया गया था। इसरो के एक अधिकारी ने बताया कि रिसैट-2बी में एक कृत्रिम रडार है जो दिन और रात में तथा यहां तक कि आसमान में बादल छाए रहने पर भी पृथ्वी की तस्वीरें ले सकेगा।

अधिकारी ने बताया कि इस उपग्रह का जीवनकाल पांच साल है और इसका इस्तेमाल सैन्य निगरानी के लिए किया जाएगा। मंगलवार को आरंभ हुई 25 घंटे की उलटी गिनती समाप्त होते ही इसरो के भरोसेमंद ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी46) ने 615 किलोग्राम वजनी उपग्रह के साथ सुबह साढ़े पांच बजे यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से उड़ान भरी।

यह पीएसएलवी-सी46 का 48वां मिशन था। उड़ान भरने के करीब 15 मिनट 30 सेकेंड के बाद रिसैट-2बी (रडार इमेजिंग सैटेलाइट-2बी) को उसकी कक्षा में छोड़ दिया गया। यह उपग्रह निगरानी, कृषि, वानिकी और आपदा प्रबंधन समर्थन जैसे क्षेत्रों में मददगार साबित होगा। इसरो अध्यक्ष के. शिवन ने मिशन नियंत्रण केंद्र से प्रक्षेपण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पीएसएलवी-सी46 ने 555 किलोमीटर की निर्दिष्ट कक्षा में रिसैट-2बी को 37 डिग्री के झुकाव के साथ सटीकता से स्थापित किया।

 शिवन ने कहा, ‘‘पीएसएलवी के लिए यह मिशन काफी महत्वपूर्ण है। इस प्रक्षेपण के साथ पीएसएलवी राष्ट्रीय, छात्रों के एवं विदेशी उपग्रहों समेत कुल 354 उपग्रह प्रक्षेपित करके अंतरिक्ष में अब तक 50 टन वजन ले कर जा चुका है।’’ इसरो के अध्यक्ष ने बताया कि पीएसएलवी-सी46 अपने साथ दो महत्वपूर्ण पेलोड -एक स्वदेश निर्मित प्रोसेसर और एक कम कीमत का ‘इनर्शल नेविगेशन सिस्टम’ लेकर गया। उन्होंने कहा, ‘‘इससे भविष्य के हमारे प्रक्षेपण यान मिशनों में क्रांति आएगी।’’ शिवन ने बताया कि रिसैट -2बी एक अत्याधुनिक पृथ्वी निगरानी उपग्रह है। उन्होंने कहा, ‘‘इस उपग्रह में एक अन्य बहुत जटिल नई प्रौद्योगिकी को भी ले जाया गया है।

यह 3.6 मीटर ‘अनफर्नेबल रेडियल रिब एंटीना’ है। यह भविष्य की तकनीक होने वाली है।’’ इसरो ने बुधवार के प्रक्षेपण के कुछ घंटों बाद कहा कि बेंगलुरू में कमांड नेटवर्क ने उपग्रह का नियंत्रण संभाल लिया है। शिवन ने भविष्य के प्रक्षेपणों के बारे में कहा, ‘‘आगामी मिशन ‘चंद्रयान दो’ भारत के लिए ऐतिहासिक मिशन होने वाला है। यह इसरो का अब तक का सबसे जटिल मिशन होने वाला है। यह मिशन इस साल नौ जुलाई से 16 जुलाई के बीच पूरा किया जाएगा।’’

 उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर छह सितंबर को उतरने की उम्मीद है। ‘‘ यह (चंद्रयान-दो) ऐसे विशेष स्थल पर उतरने वाला है, जहां पहले कोई नहीं गया है।’’ शिवन ने बताया कि चंद्रयान-दो के बाद, ‘‘इसरो अत्यंत उच्च रेजोल्यूशन वाले ‘कार्टोसैट 3’ उपग्रह के प्रक्षेपण पर गौर करेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पुन: उपयोग में लाए जाने वाले प्रक्षेपण यान का दूसरा प्रदर्शन आगामी महीनों में होगा।

कम लागत वाले छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान संबंधी गतिविधियां कुछ महीनों में होंगी।’’ बुधवार को किया गया प्रक्षेपण पीएसएलवी का 2019 में तीसरा प्रक्षेपण था। इसरो ने ‘रिसैट-1’ का प्रक्षेपण 26 अप्रैल 2012 को किया था। यह श्रीहरिकोटा से 72वां प्रक्षेपण यान मिशन था और प्रथम लॉन्च पैड से 36वां प्रक्षेपण था।