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सीएए के तहत भारतीय नागरिकता पाने के लिए लोगों को देना होगा धर्म का सबूत

देश के कई राज्य में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस नए कानून के तहत भारतीय नागरिक के लिए आवेदन करने वाले को अपने धर्म को साबित करना होगा। सूत्र ने बताया कि सरकार सीएए के तहत नागरिकता आवेदन के लिए अलग विंडो की असम सरकार की मांग को भी स्वीकार कर सकती है। 

राज्य ने गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था कि यह विंडो कुछ समय के लिए ही खुले। यह समयसीमा कम से कम तीन महीने की हो सकती है, ताकि अवैध अप्रवासी नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकें। 

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बता दें कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक (हिंदू, सिख, जैन बुद्ध, ईसाई और पारसी) जो वहां धार्मिक भेदभाव झेल रहे हैं उन्हें संशोधित कानून (सीएए) के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी। 

इस कानून से मुस्लिम समुदाय को बाहर रखा गया है और ये उन लोगों पर लागू होगा जो साल 2014 के दिसंबर से पहले भारत आए हैं।  इसमें कोई सरकारी दस्तावेज, बच्चों का स्कूल एनरोलमेंट, आधार इत्यादि दिखाया जा सकता है। साथ ही उन्हें सभी दस्तावेजों को दिखाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी जिससे साबित हो कि वे 2014 दिसंबर से पहले भारत आए थे।