BREAKING NEWS

फांसी से बचने के लिए निर्भया के आरोपी विनय ने चला एक और पैंतरा, चुनाव आयोग में दी अर्जी◾उपहार त्रासदी : अंसल बंधुओं को SC से मिली राहत, पीड़ितों की क्यूरेटिव पेटिशन हुई खारिज ◾बिहार में लगे राहुल गांधी के पोस्टर, लिखा-आरक्षण खत्म करने का सपना नहीं होगा सच◾आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बोले- 'राष्ट्रवाद' शब्द में हिटलर की झलक◾निर्भया मामला : दोषी विनय ने तिहाड़ जेल में दीवार पर सिर मारकर खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की◾चीन में कोरोना वायरस का कहर जारी, मरने वालों की संख्या 2000 के पार◾मनमोहन ने की Modi सरकार की आलोचना, कहा - सरकार आर्थिक मंदी को स्वीकार नहीं कर रही है◾अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के मद्देनजर J&K में सुरक्षा बल सतर्क◾राम मंदिर का मॉडल वही रहेगा, थोड़ा बदलाव किया जाएगा : नृत्यगोपाल दास ◾मुंबई के कई बड़े होटलों को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल भेजने वाला लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य◾‘हिंदू आतंकवाद’ की साजिश वाली बात को मारिया ने 12 साल तक क्यों नहीं किया सार्वजनिक - कांग्रेस◾सरकार को अयोध्या में मस्जिद के लिए ट्रस्ट और धन उपलब्ध कराना चाहिए - शरद पवार◾संसदीय क्षेत्र वाराणसी में फलों फूलों की प्रदर्शनी देख PM मोदी हुए अभिभूत, साझा की तस्वीरें !◾दुनिया भर में कोरोना वायरस का प्रकोप, विश्व में अब तक 75,000 से अधिक लोग वायरस से संक्रमित◾आर्मी हेडक्वार्टर को साउथ ब्लॉक से दिल्ली कैंट ले जाया जाएगा : सूत्र◾INDO-US के बीच व्यापार समझौता ‘अटका’ नहीं है : डोनाल्ड ट्रंप ने कहा - जल्दबाजी में यह नहीं किया जाना चाहिये◾कन्हैया ने BJP पर साधा निशाना , कहा - CAA से गरीबों एवं कमजोर वर्गों की नागरिकता खत्म करना चाहती है Modi सरकार◾महंत नृत्य गोपाल दास बने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष , नृपेंद्र मिश्रा को निर्माण समिति की कमान◾पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धू के AAP में जाने की अटकलें , भगवंत बोले- कोई वार्ता नहीं हुई◾पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले नवजोत सिद्धू AAP में जाने की अटकलें , भगवंत बोले- कोई वार्ता नहीं हुई◾

CAA पर तुरंत रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार, केंद्र को दिया चार हफ्ते का वक्त

नागरिकता संशोधित कानून (सीएए) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया है। साथ ही अगली सुनवाई में कोर्ट सीएए की संवैधानिक वैधता तय करने के लिए वह अपीलों को संविधान पीठ के पास भेज सकता है। मामले की सुनवाई शुरू होते ही केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 143 याचिकाओं में से करीब 60 की प्रतियां सरकार को दी गई हैं।

केंद्र सरकार ने कहा कि सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली उन याचिकाओं पर जवाब देने के लिए उसे समय चाहिए जो उसे अभी नहीं मिल पाई हैं। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से सीएए के क्रियान्वयन पर रोक लगाने और एनपीआर की कवायद फिलहाल टाल देने का अनुरोध किया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र का पक्ष सुने बिना सीएए पर कोई स्थगन आदेश जारी नहीं करेगा। 

कोर्ट ने केंद्र को सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया है। साथ ही सीएए का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने संबंधी आदेश कोर्ट चार हफ्ते बाद ही जारी करेगा। सुप्रीम कोर्ट सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन करेगा। सुप्रीम कोर्ट  ने याचिकाओं पर फैसला सुनाने तक सभी हाई कोर्ट के सीएए संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करने पर रोक लगाई।

सीएए में 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन और पारसी समुदायों के शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी जिससे उसने कानून की शक्ल ले ली। 

दिल्ली विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने जारी की स्टार प्रचारकों की लिस्ट, सिद्धू समेत कई नेता शामिल

आईयूएमएल ने अपनी याचिका में कहा कि सीएए बराबरी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और इसका मकसद धर्म के आधार पर लोगों को बाहर कर अवैध शरणार्थियों के एक वर्ग को नागरिकता देना है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों पर ‘‘कठोर हमला’’ है।

 राजद नेता मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं दायर की हैं। कई अन्य याचिकाकर्ताओं में मुस्लिम संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू), पीस पार्टी, भाकपा, एनजीओ ‘रिहाई मंच’ और सिटिजंस एगेंस्ट हेट, वकील एम एल शर्मा और कानून के छात्र शामिल हैं।