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न्यायालय अनुच्छेद 370 को चुनौती देने वाली याचिका पर शीर्ष सुनवाई करने पर करेगा विचार

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने पर विचार किया जायेगा। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने के साथ ही इस राज्य के लिये कानून बनाने के संबंध में संसद के अधिकार सीमित करता है। 

प्रधान न्यायाधीश , न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ के समक्ष अधिवक्ता एवं भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अपनी याचिका का उल्लेख करते हुये इसे शीघ्र सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। पीठ ने कहा कि इस बारे में आवेदन दायर करें फिर हम गौर करेंगे। 

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इससे पहले, 18 फरवरी को भी उपाध्याय ने अपनी याचिका सुनवाई के लिये शीघ्र सूचीबद्ध करने का उल्लेख किया था। उपाध्याय ने अपनी याचिका में दलील दी है कि संविधान तैयार किये जाते वक्त यह विशेष प्रावधान अस्थाई स्वरूप का था और 26 जनवरी, 1957 को जम्मू कश्मीर की संविधान सभा भंग होने के साथ ही अनुच्छेद 370 (3) भी खत्म हो गया। 
याचिका में जम्मू कश्मीर के अलग संविधान को कई आधारों पर मनमाना और असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध न्यायालय से किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह देश के संविधान की सर्वोच्चता के खिलाफ और ‘‘एक राष्ट्र, एक संविधान, एक राष्ट्रगान और एक राष्ट्रीय ध्वज’’ के सिद्धांत के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर का संविधान अवैध है क्योंकि इसे अभी तक राष्ट्रपति की संस्तुति नहीं मिली है जो देश के संविधान के प्रावधानों के अनुसार अनिवार्य है। इस याचिका पर अगले सप्ताह विचार होने की सम्भावना है।