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राज्यसभा में वाईएसआर सदस्य ने अपने निजी विधेयक पर मतविभाजन की मांग की, सरकार ने किया विरोध

नयी दिल्ली : राज्यसभा में शुक्रवार को अजीव स्थिति पैदा हो गयी जब वाईएसआर कांग्रेस के विजयसाई रेड्डी ने अपने एक निजी विधेयक पर मतविभाजन की मांग की और सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि संविधान विधेयक होने के नाते इसके लिए जरूरी सदस्य सदन में मौजूद नहीं हैं। 

रेड्डी के इस निजी विधेयक में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के वंचित लोगों को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आबादी के अनुरूप प्रतिनिधित्व दिये जाने की मांग की गयी है। रेड्डी ने अपने निजी विधेयक संविधान (संशोधन) विधेयक (नये अनुच्छेद 330 क और 332क का अंत:स्थापन) पर चर्चा के बाद मतविभाजन की मांग की। लेकिन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सदन के नेता थावरचंद गहलोत ने मतविभाजन का विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान संशोधन विधेयक है। इसके लिए सदन में आधे सदस्यों की मौजूदगी और इसका दो-तिहाई से पारित होना जरूरी है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हुयी। पीठासीन उपसभापति सत्यनारायण जटिया ने व्यवस्था दी कि मतविभाजन के लिए आधे सदस्यों की मौजूदगी (123) जरूरी है। 


इसके बाद रेड्डी ने सरकार पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया और सदन से वाकआउट किया। अंतत: सदन ने रेड्डी के निजी विधेयक को ध्वनिमत से नामंजूर कर दिया। इससे पूर्व चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए प्रसाद ने कहा कि संविधान के निर्माताओं ने सिर्फ दो वर्गों अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए ही आरक्षण का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा 2026 तक लोकसभा एवं विधानसभाओं की सीटों की संख्या में वृद्धि नहीं की जा सकती। ऐसे में अगर और आरक्षण दिया गया तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण से वंचित होंगे। प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई अन्य नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि वे ओबीसी समुदाय से आने के बाद भी अपनी मेहनत और लोकप्रियता के आधार पर बिना आरक्षण के भी काफी आगे बढ़े। 

प्रसाद ने कहा कि उनकी पार्टी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की प्रगति के लिए समर्पित है और इस संबंध में सभी राजनीतिक दलों को पहल करनी चाहिए। लेकिन रेड्डी ने कहा कि उनके इस विधेयक पर हुयी चर्चा में ज्यादातर सदस्यों ने इसका समर्थन किया। भाजपा सदस्य राकेश सिन्हा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य समरसता पर आधारित समावेशी समाज बनाना है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर जोर देना चाहिए कि चुनाव जाति से मुक्त हो और इसके लिए जनता तैयार है। विधेयक पर चर्चा की शुरूआत 21 जून को हुयी थी।