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महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला के बाद पूर्व IAS शाह फैसल पर भी लगा PSA

पूर्व आईएएस और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) अध्यक्ष शाह फैसल पर जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। फैसल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से इस्तीफा देकर जेकेपीएम की स्थापना की थी। शाह फैसल को भी महबूबा मुफ़्ती, उमर अब्दुल्ला और बाकी नेताओं की तरह ही अगस्त 2019 में हिरासत में लिया गया था। 

फैसल की नियमानुसार ऐहतियातन हिरासत की 6 महीने की अवधि पूरी होने वाली थी, जिसको देखते हुए अब उन पर पीएसए लगा दिया गया है। जम्मू-कश्मीर से केंद्र द्वारा अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद शाह फैसल को सीआरपीसी की धारा 107 के तहत हिरासत में लिया गया था। 

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बाद में उन्हें कस्टडी में लेकर एमएलए हॉस्टल में रखा गया था। अभी ये तय नहीं है कि उन्हें उनके घर में शिफ्ट किया जाएगा या एमएलए हॉस्टल में ही रखा जाएगा। पीएसए के तहत कानून प्रशासन को किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के छह महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है।

क्या है PSA?

जन सुरक्षा कानून यानी (पीएसए) के तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना ट्रायल के दो साल तक नजरबंद कर सकती है। पीएसए के तहत दो प्रावधान हैं-लोक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा को खतरा। 1978 में शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को लागू किया था। 2010 में इसमें संशोधन किया गया था, जिसके तहत बगैर ट्रायल के ही कम से कम 6 महीने तक जेल में रखा जा सकता है।