सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें एस. पी. वैद्य को जम्मू एवं कश्मीर के पुलिस महानिदेशक के पद से हटाने को पुलिस सुधार पर शीर्ष अदालत के निर्देशों का उल्लंघन और इसकी ‘पूरी तरह से अवमानना’ बताया गया है।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने मामले में जवाब मांगते हुए महान्यायवादी के. के. वेणुगोपाल से सहयोग करने को कहा। अदालत ने निर्देश दिया कि आवेदन की एक प्रति महान्यायवादी सहयोगी वकील बीनू टम्टा और मामले में न्यायमित्र वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन को दी जाए।

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वैद्य को 6 सितंबर की आधी रात उनके पद से हटा दिया गया था। वेणुगोपाल ने अदालत से कहा कि अदालत ने कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक के नियुक्ति पर राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस बलों के प्रमुख के लिए निर्धारित किए गए दो वर्ष के कार्यकाल के दुरुपयोग को समाप्त करने के लिए रोक लगाई है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि वैद्य को हटाना सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

उन्होंने वैद्य के उत्तराधिकारी दिलबाग सिंह की नियुक्ति पर सवाल उठाए और कहा कि उनके खिलाफ नियुक्ति घोटाले में चार्जशीट दर्ज हो चुकी है।

पुलिस सुधार पर 2006 में अदालत का आदेश प्रकाश सिंह की याचिका पर आया था। भूषण ने अदालत से कहा कि वैद्य को बिना उनके खिलाफ किसी आरोप और राज्य सुरक्षा अयोग से सलाह किए बिना ही हटाया गया। अदालत ने मामले की सुनवाई अगले हफ्ते के लिए मुकर्रर कर दी।