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प्रचार अभियान रोक लगाने का चुनाव आयोग का फैसला समझ से परे : येचुरी

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी हिंसा के मद्देनजर निर्धारित समय से एक दिन पहले चुनाव प्रचार प्रतिबंधित करने के चुनाव आयोग के फैसले को समझ से परे बताते हुये आयोग से पूछा है कि प्रचार पर रोक लगाने का समय राज्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैलियों के बाद क्यों निर्धारित किया गया है।

येचुरी ने बुधवार को आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुये कहा कि हिंसा के लिये जिम्मेदार भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं के खिलाफ आयोग ने कोई कार्रवाई करने के बजाय प्रचार पर रोक लगा दी। आयोग का यह फैसला समझ से परे है। येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘एक दिन पहले प्रचार अभियान को रोकने का चुनाव आयोग का फैसला समझ से परे है।

आयोग से अव्वल तो यह अपेक्षित था कि भाजपा और टीएमसी के अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाती। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गयी?’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने पश्चिम बंगाल में हिंसा और कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के बारे में आयोग से कई बार शिकायत की, लेकिन आयोग से इस पर कोई प्रति उत्तर नहीं मिला।’’

येचुरी ने प्रचार अभियान पर रोक लगाने के समय पर सवाल उठाते हुये कहा, ‘‘अगर प्रचार को 72 घंटे पहले ही प्रतिबंधित करना था तो प्रतिबंध का समय कल (बृहस्पतिवार) सुबह दस बजे तय क्यों नहीं किया गया? क्या यह प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों को आयोजित करने की छूट देने के लिये किया गया है?’’ उल्लेखनीय है कि मोदी की 16 मई को पश्चिम बंगाल के दमदम और लक्ष्मीकांतपुर लोकसभा क्षेत्र में दो रैली प्रस्तावित हैं।