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इमोशनल अपील के साथ थाने पहुंची 9 साल की ऋतिक्षा की पुलिस ने की मदद, ढूंढ निकाला दिवंगत मां का फोन

कोरोना काल में अपनी मां को गवाने के बाद उनके फोन को खोजने की भावुक अपील लेकर थाने पहुंची 9 साल की ऋतिक्षा को उसके प्रयास में सफलता हासिल हुई है। कर्नाटक पुलिस ने बच्ची की अपील पर खोजबीन कर उसकी मां का मोबाइल फोन ढूंढकर उसे लौटा दिया है। ऋतिक्षा ने अपने अपील में कहा था कि उस फोन में उसकी मां की कुछ तस्वीरें और वीडियो हैं।

मार्च में कोविड -19 के कारण ऋतिक्षा की मां की मौत हो गई थी। हालांकि अस्पताल के अधिकारियों ने सामान वापस कर दिया था लेकिन मोबाइल फोन कभी वापस नहीं किया गया। मदिकेरी की पुलिस अधीक्षक क्षमा मिश्रा ने गुरुवार को चॉकलेट बार के साथ ऋतिक्षा को उनके कार्यालय में फोन लौटा दिया। परिवार ने मोबाइल को पहचान लिया था और आईएमईआई नंबर के जरिए इसकी पुष्टि की गई। 

इनबिल्ट स्टोरेज में सभी डेटा और तस्वीरें बरकरार थीं। एसपी क्षमा मिश्रा ने बताया, "हमें खुशी है कि मोबाइल फोन का पता लगाया जा सका और उसे वापस कर दिया गया। सेल फोन में लड़की की मां की यादें हैं।" मोबाइल फोन वापस पाने वाली ऋतिक्षा ने कहा कि उन्हें हमेशा से विश्वास था कि चोरी हुआ फोन वापस मिल जाएगा। 

उन्होंने कहा, "मेरे पिता ने इन दिनों मुझ पर विश्वास नहीं किया। मेरी मां की तस्वीरें, मेरी ऑनलाइन कक्षाओं से संबंधित डेटा बरकरार है।" पुलिस ने कहा कि अस्पताल के कर्मचारियों को स्टोर रूम के पास ऋतिक्षा का मोबाइल मिला और उसे डीन को लौटा दिया गया। 

ऋतिक्षा ने कोडागु की उपायुक्त चारुलता सोमल, पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक के केजीबोपैया और अपाचू रंजन को एक दिल दहला देने वाला पत्र लिखा था और साथ ही कोडागु इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (केआईएमएस) के कर्मचारियों को अपनी मां का मोबाइल फोन ढूढने में मदद करने के लिए लिखा, जो अस्पताल में चोरी हो गया था। 

उन्होंने उल्लेख किया था, "कुशलनगर के एक पेंटर की बेटी ऋतिक्षा ने हाथ में एक पत्र लेकर तीन महीने पहले फोन वापस करने की अपील करते हुए कहा था कि इसमें उनकी मां की कुछ बेहतरीन तस्वीरें हैं। मुझे अपनी मां के बिना अपना जीवन जीना है।" ऋतिक्षा के परिवार में तीन लोग हैं, उनके पिता टी.आर. नवीन कुमार, उनकी दादी प्रभा और वो खुद। उनका 6 मई को कोविड परीक्षण पॉजिटिव आया। प्रभा को हालत गंभीर होने पर अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। 16 मई को केआईएमएस अस्पताल में उसकी मौत हो गई। 

हालांकि उसका सामान वापस कर दिया गया, लेकिन परिवार को अस्पताल के अधिकारियों से प्रभा का मोबाइल फोन नहीं मिला। उसने अपने पत्र में अपील की, "मैं अपने पिता के साथ आईसोलेशन में हूं। हम भोजन और अन्य आवश्यकताओं के लिए पड़ोसियों पर निर्भर हैं। मेरी मां की मौत के बाद, उनका मोबाइल फोन हमें वापस नहीं किया गया है। मैं अब एक अनाथ हूं। उस मोबाइल फोन में सबसे अच्छी तस्वीरें हैं मेरी मां और हमारी यादें संग्रहीत हैं।" 

यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस संबंध में जिला पुलिस को नोटिस जारी किया है। मदिकेरी सिटी पुलिस ने स्वत: संज्ञान लिया है। छोटी बच्ची की अपील वायरल हो गई और पूरे देश में कई दिलों को पिघला दिया। लोगों ने मरीजों का सामान चुराने के रवैये को भी अमानवीय बताया और अस्पताल के कर्मचारियों पर अपना गुस्सा निकाला।