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इंदिरा गांधी पर की गई टिप्पणी को लेकर मचे बवाल के बाद संजय राउत ने वापस लिया अपना बयान

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर मचे बवाल के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने अपना बयान वापस ले लिया है। उन्होंने कहा, हमारे कांग्रेस मित्रों को आहत होने की जरूरत नहीं है। अगर किसी को लगता है कि मेरे बयान से इंदिरा गांधी जी की छवि को धक्का पहुंचा है या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो मैं अपने बयान को वापस लेता हूं। 

वहीं बयान को लेकर सफाई देते हुए कहा, मुंबई के इतिहास की समझ ना रखने वालों ने उनके बयान को ‘‘तोड़-मरोड़’’ डाला। राउत के अनुसार, उनके कहने का आशय यह था कि करीम लाला पठान समुदाय के प्रतिनिधि थे और उनकी यही हैसियत उनसे पूर्व प्रधानमंत्री की मुलाकात की वजह थी। 

गौरतलब है कि पुणे में लोकमत मीडिया समूह के एक कार्यक्रम के दौरान दिए एक साक्षात्कार में राउत ने दावा किया था, ‘‘जब (अंडरवर्ल्ड डॉन) हाजी मस्तान मंत्रालय आए थे, तो पूरा सचिवालय उन्हें देखने नीचे आ गया था। इंदिरा गांधी पायधुनी (दक्षिण मुम्बई) में करीम लाला से मिला करती थीं।’’ करीम लाला, मस्तान मिर्जा उर्फ हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार मुम्बई के बड़े माफिया सरगना थे, जो 1960 से लेकर अस्सी के दशक तक सक्रिय रहे। 

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कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा और संजय निरुपम द्वारा राउत के बयान की निंदा किए जाने और उनसे बयान वापस लेने की मांग करने के बाद राउत ने यह सफाई दी है। राउत ने ट्वीट किया, ‘‘ करीम लाला पठान समुदाय के नेता थे और 'पख्तून-इ-हिन्द' नाम के संगठन का नेतृत्व करते थे। इसलिए पठान समुदाय के नेता के तौर उन्होंने इंदिरा गांधी सहित कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। 

बहरहाल, जिन्हें मुम्बई के इतिहास की जानकारी नहीं है, वे मेरे बयान को तोड़-मरोड़ रहे हैं।’’ राज्यसभा सांसद ने अन्य एक ट्वीट में शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजीव सातव को टैग करते हुए कहा, ‘‘मैं लौह महिला के रूप में इंदिरा गांधी की प्रशंसा करने से कभी नहीं कतराया, जो कड़े निर्णय लेती थीं। ताज्जुब की बात यह है कि जो लोग इंदिरा जी का इतिहास नहीं जानते वे ही हल्ला मचा रहे हैं।’’ 

महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे ने बुधवार को नयी दिल्ली में राहुल गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की थी। शिवेसना ने दोनों नेताओं के बीच इसे एक नियमित मुलाकात बताया है। इससे दो दिन पहले संसद परिसर में हुई विपक्षी दल की एक महत्वपूर्ण बैठक में शिवसेना शामिल नहीं हुई थी।