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अस्पृश्यता किसी भी रूप में अमानवीय आचरण: राष्ट्रपति

हरिद्वार, संजय चौहान (पंजाब केसरी): राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात संविधान द्वारा अस्पृश्यता का अंत किया गया और उसे दंडनीय भी बनाया गया। किसी भी रूप में अस्पृश्यता एक अमानवीय आचरण है। भारत सरकार द्वारा भी कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के प्रति भेदभाव को कानूनी तौर पर समाप्त कर दिया गया। संविधान के अनुच्छेद 17 द्वारा जाति एवं धर्म पर आधारित अस्पृश्यता का अंत तो कर दिया गया, परंतु दुर्भाग्य से सदियों से चली आ रही कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के प्रति मानसिक अस्पृश्यता आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है।
राष्ट्रपति रविवार को दिव्य प्रेम सेवा मिशन के रजत जयंती वर्ष समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ने कहा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है प्राचीन काल में सभी संस्कृतियों में कुष्ठ रोगों को अभिशाप, बुरे कर्मों का दंड तथा कलंक के रूप में देखा जाता था, आज भी देखा जाता है। यह अज्ञानता आधुनिक युग में भी विद्यमान है, और इस अवैज्ञानिकता के अवशेष अभी भी पूरी तरह से लुप्त नहीं हुए हैं। इसके प्रति अनेक गलतफहमियां तथा आशंका इस समाज में फैली हुई है। इन आशंकाओं को दूर करने में दिव्य प्रेम सेवा मिशन के सार्थक प्रयासों की मैं सराहना करता हूं।
राष्ट्रपति ने कहा कि गांधीजी का मानना था कि कुष्ठ रोग हैजा और प्लेग एक जैसी ही बीमारी है, जिनका इलाज हो सकता है। अतः इसके रोगियों को हीन समझने वाले लोग ही असली रोगी होते हैं। गांधीजी का यह संदेश आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोगियों की सेवा के उद्देश्य से ही दिव्य प्रेम सेवा मिशन की नींव रखी गई थी। दो दशक पहले समाज की परंपराओं के विरुद्ध जाकर मिशन की स्थापना और विकास किया गया था, जो एक उदाहरण पेश करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भी कुष्ठ रोगियों की सेवा के विषय में अत्यंत सचेत रहा करते थे। उन्होंने विदेशी यात्रा के दौरान भी कुछ रोगियों के उपचार के विषय में लोगों को जानकारी प्रदान दी। उन्होंने देश के युवाओं से आग्रह करते हुए कहा कि वे कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों की सेवा करने के अनुकरणीय उदाहरणों से प्रेरणा प्राप्त कर अपना योगदान प्रदान करें।
इस अवसर पर भारत की प्रथम महिला नागरिक सविता कोविंद, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, बाबा रामदेव, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष आशीष गौतम, संयोजक संजय चतुर्वेदी ने विचार रखे। समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, धन सिंह रावत और विधायक प्रदीप बत्रा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।
राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने रविवार को हरिद्वार स्थित दिव्य प्रेम सेवा मिशन के रजत जयंती समारोह को सम्बोधित किया। उन्होंने दिव्य प्रेम सेवा मिशन को संकल्प  और सेवा की भावना के साथ मानव कल्याण हेतु संवेदनशीलता से कार्य करने वाली संस्था बताते हुए कहा कि आज से 25 वर्ष पूर्व इस संस्था को एक छोटे बीज के रूप में बोने में उनकी भी भूमिका रही है, जो आज बड़ा वृक्ष बन गई है।राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखण्ड की पवित्र धरती आध्यात्म् के साथ ही शांति एवं ज्ञान की भूमि रही हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ के साथ हरिद्वार व हर द्वार भगवान विष्णु एवं शिव की प्राप्ति के द्वार हैं। पतित पावनी जीवन दायिनी गंगा भी इसकी साक्षी है। उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार राज्य सभा के संसद बने तब भी तथा राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनकी पहली यात्रा उत्तराखण्ड की रही। उन्होंने कहा कि पवित्र गंगा के तट पर स्थापित यह मिशन मानव सेवा के लिए समर्पित हैं। संस्था द्वारा कुष्ठ रोगियों की समर्पित भाव से की जा रही सेवा सराहनीय है। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद संविधान द्वारा जाति एवं धर्म पर आधारित अस्पृश्यता का तो अंत कर दिया गया लेकिन अभी भी कुष्ठ के प्रति अस्पृश्यता का भाव समाप्त नहीं हो पाया है। कुष्ठ रोग को कलंक के रूप में देखे जाने की अवेज्ञानिकता के अवशेष आज भी देखे जाते हैं। कुष्ठ रोगियों के प्रति व्याप्त आशंकाओं को दूर करने के प्रयास किये जाने चाहिए। उन्हें भी बीमारी के दौरान तथा उसके बाद स्वास्थ्य होने पर अन्य रोगों से मुक्त होने वाले रोगियों की तरह ही अपनाया जाना चाहिए। इस सम्बन्ध में समाज मे फैली आंशकाओं को दूर करने के प्रयासों की भी उन्होंने जरूरत बतायी।
 राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी कुष्ठ रोगियों की सेवा कर समाज को इसके लिये प्रेरित किया था। महात्मा गांधी का जन्मदिन राष्ट्रीय कुष्ठ दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग असाधारण नही है। इसे असाधारण समझने वाले ही असली रोगी है। राष्ट्रपति ने कहा कि कुष्ठ रोगियों के बीच कार्य करने वालों का आत्मविश्वास कितना ऊंचा होता है, इस संस्था से जुड़े लोग इसका उदाहरण है।


इससे पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने दिव्य प्रेम सेवा मिशन, सेवाकुंज परिसर पहुंचने पर शिव अवतरण, शिव ज्ञान से जीव सेवा यज्ञ, सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग पूजन, एक वर्षीय अनुष्ठान कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इसके पश्चात उन्होंने दिव्य प्रेम सेवा मिशन, सेवाकुंज परिसर में बिल्ब के पौधे का रोपण भी किया।  इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल से.नि. गुरमीत सिंह ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम ‘सेवा की साधना’ को समर्पित है,  सेवा की साधना की प्रेरणा हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों की देन है। भारतीय शास्त्रों की देन है, जिनमें परोपकार को सबसे बड़ा पुण्य कहकर महिमामण्डित किया गया है।  पवित्र गुरुवाणी और सिक्ख जीवन दर्शन में सेवा और परिश्रम को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। संस्था की इन स्वर्णिम उपलब्धियों’ की पृष्ठभूमि में पिछले पच्चीस वर्षों की तपस्या, सेवा और निष्ठा छिपी हुई है।
उन्होंने कहा कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन ने, ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ के मंत्र को समझा और एक कठिन कार्य को अपने हाथों में लिया है। कुष्ठ रोगियों के बच्चों के भविष्य को उज्जव बनाने का संकल्प लिया, उनकी शिक्षा और दीक्षा का संकल्प लिया, कला और कौशल विकास का संकल्प लिया यह सब असंभव को संभव बनाने जैसा है। ये कार्य एक सच्चा देशभक्त, राष्ट्रभक्त ही कर सकता है।
स्वामी विवेकानन्द जी ने दुनियां के सामने विश्व गुरू भारत की संकल्पना दी थी, उस संकल्पना की पूर्ति भारतीय ज्ञान के विस्तार और सेवा की सच्ची भावना से ही हो सकती है। भारत के युवा जितने ज्ञानी और सेवा भावी होंगे हमारा देश उसी गति से विश्वगुरू के अपने पद को प्राप्त कर सकेगा।
राज्यपाल ने कहा कि सेवाभावी भारत के निर्माण के लिए युवाओं द्वारा गरीबों, वंचितो, निर्बलों की सेवा का संकल्प लेना होगा। स्वामी विवेकानन्द के ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ के मंत्र को सच्चे अर्थो में अपनाना होगा। ज्ञान की उपासना और सेवा की पराकाष्ठा ही हमें विश्व गुरू के पथ पर अगे ले जा सकती है। यह समारोह इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरणा देने वाला है।
 इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन से जुड़े लोगों ने वर्ष 1997 से आजतक तिल तिल जलाकर इस मिशन को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि जिसके प्रेम में दिव्यता होती है उनके लिये दूसरों की सेवा करना ही धर्म बन जाता है। कुष्ठ रोगियों के हित के लिये यह संस्था निरन्तर कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे सैनिक के पुत्र है और सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता हैं। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति सहित अन्य अतिथियों का उत्तराखण्ड की जनता की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की जनता ने राज्य के अंदर एक नया इतिहास बनाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मिशन के संकल्प में कोई विकल्प नहीं है। अतः इस विकल्प रहित संकल्प के सेवा के मिशन को पूर्ण करने में उनका सहयोग रहेगा।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन के डॉ आशीष गौतम ने संस्था के कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर देश की प्रथम महिला श्रीमती सविता कोविन्द, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डा0 धन सिंह रावत, सांसद रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विधायक श्री आदेश चौहान, श्री प्रदीप बत्रा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए (दाएं) राष्ट्रपति एक बड़े कलश में परिवार सहित दुग्ध अर्पित करते हुए। (छाया : पंजाब केसरी)