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किसानों के आंदोलन को धार्मिक रंग दे रही हैं SGPC प्रमुख, इतिहास उन्हें कभी नहीं करेगा माफ : भाजपा

पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव हरजीत सिंह ग्रेवाल ने बुधवार को किसान आंदोलन में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की भूमिका की निंदा की है। एसजीपीसी की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर को ग्रेवाल ने एक पत्र लिखा है और इसकी प्रति उन्होंने मीडिया को भी जारी की है। कौर ने घोषणा की थी कि दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे किसानों की सुविधा के लिए एसजीपीसी अस्थायी टिन शेड बनाएगी।

ग्रेवाल ने कहा, "एसजीपीसी की प्रमुख भूमिका गुरुद्वारों के मामलों का प्रबंधन करना है। पूरी तरह से धार्मिक संस्था होने के नाते एसजीपीसी का किसानों के आंदोलन में शामिल होना बिल्कुल गलत है क्योंकि इसमें सभी धर्मों और जातियों के किसान शामिल हैं। एसजीपीसी का यह कदम सिख गुरुद्वारा अधिनियम 1925 और पंजाब अधिनियम 1925 के खिलाफ है। ऐसा करके न केवल एसजीपीसी अपने असल काम से दूर हो रही है कि बल्कि वह किसानों के आंदोलन को भी एक धार्मिक रंग भी दे रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।"

पंजाब के हमेशा से एक अस्थिर राज्य होने की बात कहते हुए उन्होंने आगे कहा, "आप जैसे जिम्मेदार और एसजीपीसी के अध्यक्ष की महत्वपूर्ण कुर्सी संभालने वाले व्यक्ति के ऐसे विवादास्पद बयान के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जो पंजाब की शांति के लिए बहुत ही हानिकारक हो सकता है।" ग्रेवाल यहीं नहीं रुके और उन्होंने आगे कहा कि इस आंदोलन को धार्मिक रंग देने के लिए इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।

उन्होंने कौर से विनम्र अपील की भी कि एसजीपीसी को ऐसी हर गतिविधि से सख्ती से निपटना चाहिए, जो इस धार्मिक संस्था के लिए अपमानजनक हो। साथ ही उसे किसान आंदोलन से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। बता दें कि कौर ने अपने बयानों में यह भी कहा है कि एसजीपीसी द्वारा चलाई जा रही 'लंगर' और मूवेबल टॉयलेट की सुविधा आगे भी जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक मृतक किसान के योगदान की श्रद्धांजलि के तौर पर उनके परिवारों को 1-1 लाख रुपये भी दिए जाएंगे।

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