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भारत का स्वर्णिम दिन: टोक्यो पैरालंपिक में हासिल की बड़ी सफलता, अवनी लेखरा और सुमित अंतिल ने जीते स्वर्ण

भारतीय पैरा एथलीटों के लिए टोक्यो पैरालम्पिक में सोमवार का दिन काफी शानदार रहा और उन्होंने 2 स्वर्ण , 2 रजत और 1 कांस्य पदक जीत डाले। 19 वर्षीया अवनी लेखरा ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल एसएच 1 स्पर्धा में 249.6 के विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी करते हुए भारत को टोक्यो पैरालम्पिक का पहला स्वर्ण पदक दिलाया जबकि सुमित अंतिल ने 68.55 मीटर की विश्व रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण जीता। 

योगेश कथुनिया ने पुरुष डिस्कस थ्रो -ऍफ़ 56 स्पर्धा में 44.38 मीटर की सत्र की सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक और दो बार के ओलम्पिक स्वर्ण विजेता देवेंद्र झाझरिया ने भाला फेंक में 64.35 मीटर की व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत जीता जबकि सुंदर सिंह गुर्जर ने 64.01 मीटर की थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता।

अवनी सातवें स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुंचीं थीं लेकिन फ़ाइनल में उन्होंने वाकई कमाल का प्रदर्शन किया और मौजूदा पैरालम्पिक चैंपियन चीन की झांग कुइपिंग को दूसरे स्थान पर छोड़ दिया। कुइपिंग ने 248.9 का स्कोर कर रजत जीता जबकि यूक्रेन की शेटनिक इरिना ने 227.5 का स्कोर कर कांस्य पदक जीता। अवनि ओलम्पिक और पैरालम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

इस बीच भारतीय भाला फेंक पैरा एथलीट सुमित अंतिल ने पुरुषों की भाला फेंक एफ64 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत लिया। स्पर्धा के फाइनल राउंड में 68.55 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सुमित ने एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण हासिल किया। फाइनल में एक अन्य भारतीय संदीप चौधरी 62.20 मीटर के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे, जबकि ऑस्ट्रेलिया के माइकल ब्यूरियन ने रजत और श्रीलंका के दुलन कोडिथुवाक्कू ने कांस्य पदक जीता।

सुमित ने पहले प्रयास में 66.95 मीटर के साथ फाइनल की शुरुआत की, लेकिन उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में 68.55 मीटर का थ्रो किया जो स्वर्ण दिलाने वाली थ्रो साबित हुई। पहले स्थान पर रहे सुमित ने दूसरे प्रयास में 68.08, तीसरे में 65.27, चौथे में 66.71 मीटर का थ्रो किया जबकि उनका छठा और अंतिम थ्रो फाउल रहा,भारत ने टोक्यो पैरालंपिक में आज पांचवां पदक अपने नाम किया है। उनसे पहले अवनि, देवेंद्र झाझरिया, सुंदर सिंह गुर्जर और योगेश काथुनिया ने भी सोमवार को देश के लिए पदक जीते थे। भारत अब तक इस पैरालंपिक में दो स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम कर चुका है.

अंतिल के स्वर्ण पदक के साथ टोक्यो पैरालिंपिक में भारत के कुल पदकों की संख्या सात हो गई है जो पैरालंपिक में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत ने आज एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीते हैं। अंतिल से पहले आज सुबह 19 वर्षीय अवनी लेखरा ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल एसएच 1 स्पर्धा में 249.6 के विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी करते हुए भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया था।

उल्लेखनीय है कि भारत ने रियो पैरालंपिक 2016 में चार पदक जीते थे, जो उनका पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। योगेश कथुनिया ने पुरुष डिस्कस थ्रो -ऍफ़ 56 स्पर्धा में 44.38 मीटर की सत्र की सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक जीता। भारत ने भाला फेंक में दो पदक हासिल किये। दो बार के ओलम्पिक स्वर्ण विजेता देवेंद्र झाझरिया ने 64.35 मीटर की व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत जीता जबकि सुंदर सिंह गुर्जर ने 64.01 मीटर की थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता।

इस बीच भारत को उस समय एक झटका लगा जब भारतीय डिस्कस थ्रोअर विनोद कुमार को टोक्यो पैरालंपिक खेलों के आयोजकों की ओर से दिव्यांगता वर्गीकरण मूल्यांकन में अयोग्य घोषित किया गया है। इसी के साथ उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक में एफ52 श्रेणी में जीता कांस्य पदक गंवा दिया।

41 वर्षीय विनोद यहां रविवार को पोलैंड के पिओटर कोसेविच (20.02 मीटर) और क्रोएशिया के वेलिमिर सैंडोर (19.98 मीटर) के बाद 19.91 मीटर के थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे, हालांकि इवेंट के बाद कुछ प्रतियोगियों द्वारा परिणाम को चुनौती दी गई थी।

आयोजकों ने एक बयान में कहा, “ प्रतियोगिता में वर्गीकरण अवलोकन मूल्यांकन और फिर वर्गीकरण पैनल द्वारा पुनर्मूल्यांकन के बाद पैनल एनपीसी इंडिया के एथलीट विनोद कुमार को स्पोर्ट्स क्लास में रखने में असमर्थ है, इसलिए उन्हें क्लासिफिकेशन नॉट कम्प्लीट (सीएनसी) के रूप में नामित किया गया है। परिणामस्वरूप वह पुरुषों के एफ52 डिस्कस थ्रो मेडल इवेंट के लिए अयोग्य हैं और उस स्पर्धा में उनके परिणाम अमान्य हैं। ”

उल्लेखनीय है कि एफ 52 श्रेणी कम शारीरिक शक्ति, बेहद कम हिलने-डुलने वाले, कम अंग या पैर की लंबाई के अंतर वाले एथलीटों के लिए है, जिसमें एथलीट सर्वाइकल, रीढ़ की हड्डी की चोट, अंग-विच्छेद और कम शारीरिक हलचल के साथ बैठ कर प्रतिस्पर्धा करते हैं। पैरा एथलीटों को उनकी दिव्यांगता के प्रकार और सीमा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। वर्गीकरण प्रणाली एथलीटों को समान स्तर की क्षमता वाले लोगों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देती है। इसी तरह विनोद कुमार को 22 अगस्त को एफ52 श्रेणी में वर्गीकृत किया गया था।