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PM मोदी ने SP पर साधा निशाना , कहा - लाल टोपी वाले लोग खतरे की घंटी,आतंकवादियों को जेल से छुड़ाने के लिए चाहते हैं सत्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर करारा हमला करते हुए कहा कि लाल टोपी वाले उत्तर प्रदेश के लिए 'खतरे की घंटी' हैं और वे आतंकवादियों को जेल से छुड़ाने के लिए सत्ता हासिल करना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री ने गोरखपुर में एम्स, खाद कारखाने और आईसीएमआर के क्षेत्रीय केंद्र का लोकार्पण करने के बाद अपने संबोधन में सपा पर जोरदार हमला किया। इसके फौरन बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि सपा की लाल टोपी भाजपा के लिए 'रेड अलर्ट' है और यही उसे सत्ता से बाहर करेगी।

PM मोदी ने समाजवादी पार्टी पर बोला करारा हमला

मोदी ने कहा, ‘‘लाल टोपी वालों को सत्ता चाहिए। घोटालों के लिए, अपनी तिजोरी भरने के लिए, अवैध कब्जे के लिए, माफियाओं को खुली छूट देने के लिए। लाल टोपी वालों को सरकार बनानी है आतंकवादियों पर मेहरबानी दिखाने के लिए, उन्हें जेल से छुड़ाने के लिए। इसलिए याद रखिये कि लाल टोपी वाले यूपी के लिए रेड अलर्ट हैं। यानी खतरे की घंटी हैं।’’

गौरतलब है कि लाल टोपी समाजवादी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहचान है।

अखिलेश यादव ने PM मोदी के बयान पर किया पलटवार

इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर पलटवार किया और कहा कि यही लाल टोपी भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। 

अखिलेश ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘भाजपा के लिए ‘रेड एलर्ट’ है महंगाई का, बेरोज़गारी-बेकारी का, किसान-मज़दूर की बदहाली का, हाथरस, लखीमपुर, महिला व युवा उत्पीड़न का, बर्बाद शिक्षा, व्यापार व स्वास्थ्य का और ‘लाल टोपी’ का क्योंकि वो ही इस बार भाजपा को सत्ता से बाहर करेगी।’’

उन्होंने इसी ट्वीट में कहा, ‘‘लाल का इंक़लाब होगा। बाइस में बदलाव होगा।’’

मोदी ने आरोप लगाया, ‘‘उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान नहीं भूल सकते कि प्रदेश में भाजपा सरकार पहले की जो सरकार थी उसने कैसे गन्ना किसानों को पैसे के भुगतान में रुला दिया था। किस्तों में जो पैसा मिलता था उसमें भी महीनों का अंतर होता था। उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों को लेकर कैसे-कैसे खेल होते थे। क्या-क्या घोटाले किए थे। इससे पूरे उत्तर प्रदेश के लोग अच्छी तरह परिचित हैं।’’

प्रधानमंत्री ने की योगी आदित्यनाथ की तारीफ

प्रधानमंत्री ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ नीत सरकार की तारीफ करते हुए कहा, ‘‘हमारी डबल इंजन की सरकार आपकी सेवा में जुटी है। पहले की सरकारों ने अपराधियों को संरक्षण देकर उत्तर प्रदेश का नाम बदनाम कर दिया था। आज माफिया जेल में हैं और निवेशक दिल खोलकर उत्तर प्रदेश में निवेश कर रहे हैं। यही डबल इंजन का डबल विकास है। इस पर जनता को विश्वास है और हमें उम्मीद है कि आपका आशीर्वाद आगे भी मिलता रहेगा।’’

मोदी ने इससे पहले 600 एकड़ क्षेत्र में 8603 करोड़ रुपए की लागत से बने हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड के खाद कारखाने, 112 एकड़ क्षेत्र में 1011 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित एम्स और गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में स्थित आईसीएमआर के रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर का लोकार्पण किया।

उन्होंने कहा कि गोरखपुर में एम्स की मांग बरसों से हो रही थी लेकिन 2017 से पहले जो सरकार चला रहे थे उन्होंने एम्स के लिए जमीन देने में हर तरह के बहाने किए। जब बात आर या पार की हो गई तब बहुत बेमन से मजबूरी में उस वक्त की सरकार ने एम्स के लिए जमीन आवंटित की थी।

मोदी ने कहा, ‘जब ऐसी परियोजनाएं पूरी होती हैं तो उनके पीछे बरसों की मेहनत होती है। यह लोग कभी इस बात को नहीं समझेंगे कि कोविड-19 महामारी के इस संकट काल में डबल इंजन की सरकार विकास में जुटी रही और काम रुकने नहीं दिया।’’

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की वजह से गोरखपुर और बस्ती मंडलों के सात जिलों में दिमागी बुखार के मामले लगभग 90% तक कम हो चुके हैं। योगी सरकार ने इस क्षेत्र में जो काम किया है उसकी चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है।

उन्होंने कहा कि एम्स और आईसीएमआर रिसर्च सेंटर (अनुसंधान केन्द्र) बनने से अब इंसेफलाइटिस से मुक्ति के अभियान को और मजबूती मिलेगी। साथ ही दूसरी संक्रामक बीमारियों और महामारियों से बचाव में भी प्रदेश को बहुत मदद मिलेगी।

मोदी ने कहा, ‘‘जब 2014 में आपने मुझे सेवा का अवसर दिया था उस समय देश में उर्वरक क्षेत्र बहुत बुरी स्थिति में था। देश के कई बड़े-बड़े खाद कारखाने बरसों से बंद पड़े थे और विदेशों से आयात लगातार बढ़ता जा रहा था। किसानों को खाद के लिए लाठी-गोली तक खानी पड़ती थी। हमने यूरिया का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों को फिर से खोलने पर ताकत लगाई। इसी अभियान के तहत गोरखपुर के इस खाद कारखाने समेत देश के चार और बड़े खाद कारखाने हमने चुने। आज उनमें से एक की शुरुआत हो गई है बाकी भी अगले वर्षों में शुरू हो जाएंगे।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘खाद के मामले में आत्मनिर्भरता क्यों जरूरी है, यह हमने कोविड-19 के संकट काल में भी देखा है। कोविड-19 से दुनिया भर में लॉकडाउन लगा। एक देश से दूसरे देश में आवाजाही रुक गई। आपूर्ति श्रृंखला टूट गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई लेकिन किसानों के लिए समर्पित और संवेदनशील हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि दुनिया में उर्वरक के दाम भले बढ़े लेकिन वह बोझ हम किसानों पर नहीं जाने देंगे।’’

उन्होंने कहा कि इसी साल एनपीके उर्वरक के लिए दुनिया में दाम बढ़ने के कारण किसानों को 43 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा सब्सिडी दी। इसके अलावा यूरिया के लिए भी सब्सिडी में हमारी सरकार ने 33 हजार करोड़ रुपए की वृद्धि की, ताकि बढ़े हुए दामों का बोझ हमारे किसानों के कंधों पर न पड़े।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खाने के तेल को आयात करने के लिए भी भारत हर साल हजारों करोड़ रुपए विदेश भेजता है। इस स्थिति को बदलने के लिए देश में ही पर्याप्त खाद्य तेल के उत्पादन के लिए राष्ट्रीय मिशन शुरू किया गया है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल के लिए कच्चे तेल पर भी भारत हर वर्ष पांच-सात लाख करोड़ रुपए खर्च करता है। इस आयात को भी हम इथेनॉल और बायोफ्यूल पर बल देकर कम करने में जुटे हैं। इथेनॉल गन्ना किसानों के लिए चीनी के अतिरिक्त कमाई का एक बहुत बेहतर साधन बन रहा है। हमारी सरकार आने से पहले उत्तर प्रदेश से सिर्फ 20 करोड़ लीटर एथेनॉल तेल कंपनियों को बेचा जाता था। आज करीब 100 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्तर प्रदेश के किसान भारत की तेल कंपनियों को बेच रहे हैं। पहले खाड़ी का तेल आता था अब जाड़ी का भी तेल आने लगा है।