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लखनऊ में होर्डिंग को लेकर SC ने कहा-UP सरकार द्वारा की गई कार्रवाई कानूनन सही नहीं

लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हिंसा करने वाले उपद्रवियों की उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वसूली के होर्डिंग लगाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस दौरान कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण मामला है। और यूपी सरकार द्वारा की यह कार्रवाई कानूनन सही नहीं है। 

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या उसके पास ऐसे होर्डिंग लगाने की शक्ति है। फिलहाल ऐसा कोई कानून नहीं है जो आपकी इस कार्रवाई का समर्थन करता हो। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से दलील देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, निजता के अधिकार के कई आयाम हैं। 

उन्होंने कहा, विरोध प्रदर्शन के दौरान हथियार उठाने वाला और हिंसा में शामिल होने वाला व्यक्ति निजता के अधिकार का दावा नहीं कर सकता है। यूपी सरकार के लोगों का ब्योरा देने के कठोर फैसले पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य की चिंता को समझ सकते है लेकिन कानून में यह फैसला वापस लेने को लेकर कोई कानून नहीं है। 

वहीं पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने दलील देते हुए कहा, दारापुरी '72 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, जो आईजी के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। सिंघवी ने बाल बलात्कारियों और हत्यारों के मामलों का उदाहरण देते हुए कहा, हम कब से और कैसे इस देश में नेम और शेम की नीति रखी है? यदि इस तरह की नीति मौजूद है, तो सड़कों और गलियों में चलने वाले व्यक्ति की लिंचिंग हो सकती है। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट के होर्डिंग हटाए जाने वाले फैसले का विपक्ष ने किया स्वागत

एक अभियुक्त की ओर से पेश वकील ने कोर्ट के सामने कहा, आपको (यूपी सरकार) इस तरह के होर्डिंग्स लगाने के लिए कानून का अधिकार नहीं है। और यह राज्य सरकार का एक संवेदनशील दृष्टिकोण है। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि इस मामले को विस्तृत सुनवाई के लिए तीन-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखा जाए। 

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 मार्च को इस मामले में सुनवाई करते हुए यूपी सरकार को 16 मार्च तक होर्डिंग हटाए जाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को झटका देते हुए जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस कमिश्नर को दंगाइयों की सभी होर्डिंग उतारने का निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने जिलाधिकारी और कमिश्नर को होर्डिंग हटवाए जाने का आदेश देते हुए  इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को दें।