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शारदीय नवरात्र की शुरुआत 7 अक्टूबर से, सिद्धपीठ शाकुंभरी देवी मंदिर में लगने वाला मेला शुरू

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित प्राचीन सिद्धपीठ मां शाकुंभरी देवी मंदिर में लगने वाला मेला बुधवार से शुरू हो गया है।

शारदीय नवत्ररात्र की शुरुआत

शारदीय नवरात्र की शुरुआत सात अक्टूबर से हो रही है जबकि आज शाकंभरी देवी मेले की शुरूआत हो गयी। मेला प्रबंधन समिति की ओर से मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। शाकुंभरी देवी मंदिर में उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब से इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की सम्भावना है।

श्रद्धालुओं की व्यवस्था के किए गए इंतजाम

जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी डा.सुमन लता ने बताया कि जिला पंचायत की ओर से श्रद्धालुओं की व्यवस्था के इंतजाम किए गए हैं। इस बार भी मेले में लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग से लेकर दूसरी सारी व्यवस्थाओं के इंतजाम किए गए है। मेले में साफ सफाई से लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष फोकस रहेगा। पहली बार मेले की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जाएगी। सात वाटर प्रूफ टेंट भी लगाए जाएंगे ताकि रात में रुकने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि मेला परिसर में अचानक आने वाले पानी की पांच किलोमीटर ऊपर से निगरानी की जाएगी। अचानक पानी आने से पहले ही वहां मौजूद फोर्स के व्यक्ति मेला परिसर में लगे सायरन बजाकर इसकी सूचना देंगे, ताकि मेला परिसर में मौजूद श्रद्धालु सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाएं।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाए गए सीसीटीवी

सुरक्षा व्यवस्था के लिए मेला परिसर में दस सीसीटीवी लगाए हैं। माता के मंदिर से 700 मीटर तक बैरिकेडिंग के साथ ही मैट भी पहली बार बिछाए जा रहे हैं, ताकि नंगे पांव आए श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़ा। साथ ही पेयजल के लिए पांच टैंकर और 150 टोंटी की व्यवस्था की गई है। 1400 मीटर क्षेत्र में लाइट की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि मेला परिसर में अब मोबाइल रेंज की परेशानी नहीं रहेगी। इसके लिए बीएसएनएल अस्थायी टावर की व्यवस्था कर रहा है।

मां शाकंभरी देवी मंदिर बेहद प्राचीन

शिवालिक के पर्वत पर स्थित मां शाकंभरी देवी मंदिर बेहद प्राचीन है। कामाख्या, रजरप्पा पीठ, तारापीठ, विंध्याचल पीठ की भांति यह भी एक सिद्ध पीठ है, क्योंकि यहां मां की प्रतिमा स्वयं सिद्ध है, जोकि दुर्लभ क्षेत्रों में ही होती है। केदार खंड के अनुसार यह शाकंभरी क्षेत्र है, इसकी महिमा अपार है। पुराण और आगम ग्रंथों में यह परम पीठ, शक्तिपीठ, सती पीठ और सिद्ध पीठ नामों से जाना जाता है।

नौ देवियों की प्रसिद्ध यात्रा मां शाकंभरी देवी के दर्शन बिना पूर्ण नहीं

भगवती सती का शीश इसी क्षेत्र में गिरा था, इसलिए इसकी गणना देवी के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में होती है। उत्तर भारत की नौ देवियों की प्रसिद्ध यात्रा मां शाकंभरी देवी के दर्शन बिना पूर्ण नहीं होती। शाकंभरी देवी मंदिर से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले ही बाबा भूरा देव का मंदिर है। माता शाकंभरी देवी के वरदान स्वरूप सर्वप्रथम यात्री बाबा भूरा देव की पूजा करते हैं।

शाकंभरी देवी मंदिर के दर्शन के लिए वेस्ट यूपी के जिलों के अलावा हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के लोग बड़ संख्या में पहुंचते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्र परसाल में दो बार यहां मेले का आयोजन होता है। एक बार आयोजन जिला पंचायत कराती है जबकि दूसरी बार जसमौर राज परिवार कराता है।

मां का प्रिय फल सराल

भक्तों द्वारा मां शाकंभरी को नारियल, चुनरी, हलवा- पूरी, खील, बताशे, ईलायचीदाना, मेवे - मिश्री व अन्य मिष्ठानों का भोग लगाया जाता है, लेकिन मां का प्रिय फल सराल है। सराल एक विशेष प्रकार का कंद मूल है जो केवल शिवालिक पहाड़ियों और उसके आसपास क्षेत्र में ही पाया जाता है। यह शकरकंद की तरह का होता है।