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हाथरस मामले में UP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से की CBI जांच की मांग

हाथरस जिले में कथित सामूहिक बलात्कार के बाद एक पखवाड़े तक जिंदगी के लिये संघर्ष करने वाली पीड़िता की मृत्यु की घटना के सिलसिले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाथरस मामले में सीबीआई जांच का निर्देश देने का अनुरोध किया।

सरकार ने न्यायालय को बताया कि वह निष्पक्ष जांच में निहित स्वार्थों द्वारा उत्पन्न की जा रही बाधाओं से बचने के लिये सीबीआई जांच कराने का आदेश देने का अनुरोध कर रही है। सरकार के तरफ से दायर हलफनामे में कहा गया कि उसने पहले ही केंद्र से हाथरस मामले में सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि हाथरस मामले में सीबीआई जांच सुनिश्चित करेगी कि कोई निहित स्वार्थ से गलत और झूठे विमर्श नहीं रच पाएगा। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध एक जनहित याचिका की प्रतिक्रिया में प्रदेश सरकार ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जाए। 

हाथरस के एक गांव में चार लोगों द्वारा कथित रूप से दुष्कर्म के एक पखवाड़े बाद दलित युवती की 29 सितंबर को दिल्ली के एक अस्पताल में गंभीर चोटों की वजह से मौत हो गई थी। प्रदेश सरकार ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच से निष्पक्ष जांच में निहित स्वार्थों द्वारा उत्पन्न की जा रही बाधाओं को दूर किया जा सकेगा। उप्र सरकार ने कहा, सीबीआई जांच सुनिश्चित करेगी कि कोई निहित स्वार्थ से गलत और झूठे विमर्श नहीं रच पाएं। प्रदेश सरकार ने हलफनामे में कहा कि उसने केंद्र सरकार से पहले ही मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का अनुरोध किया है। 

कथित सामूहिक दुष्कर्म और मौत के मामले के अलावा राज्य सरकार ने सीबीआई से प्रदेश में सांप्रदायिक विद्वेष, हिंसा भड़काने, मीडिया के एक वर्ग द्वारा भड़काऊ प्रचार की घटना और राजनीतिक हितों की कथित साजिश के संबंध में दर्ज प्राथमिकी की जांच करने का अनुरोध किया है। बता दें कि हाथरस जिले के एक गांव में 14 सितंबर को 19 वर्षीय दलित लड़की से चार लड़कों ने कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया था। इस लड़की की बाद में 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी। 

पीड़ित लड़की की 30 सितंबर की देर रात उसके घर के पास अंत्येष्टि कर दी गयी थी। उसके परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने मृतक का अंतिम संस्कार जल्दी करने के लिये दबाव डाला था। हालांकि, स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के अनुसार ही उसकी अंत्येष्टि की गयी। इस मामले के तूल पकड़ने के साथ ही उप्र सरकार ने सारे मामले की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश की है और ‘एफएसएल’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुये बलात्कार के आरोप से इंकार किया है।

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