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विदेश

पाक सरकार का फैसला, दोषी या विचाराधीन कैदियों को मीडिया कवरेज नहीं देनी चाहिए

इस्लामाबाद : पाकिस्तान सरकार ने यह फैसला किया है कि किसी भी दोषी या विचाराधीन कैदी को मीडिया कवरेज नहीं दी जाए। साथ ही, उनका इंटरव्यू भी नहीं लिया जाना चाहिए। 

मीडिया में आई खबर के मुताबिक पाकिस्तान सरकार के इस कदम का उद्देश्य जेल में कैद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी जैसे नेताओं को प्रेस द्वारा दी जाने वाली कवरेज पर रोक लगाना है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की और पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा ऐसे कार्यक्रमों के प्रसारण किए जाने को हतोत्साहित करने की अपनी जिम्मेदारी निभाए। 

डॉन अखबार की खबर के मुताबिक शिक्षा मंत्री शफकत महमूद ने बताया कि खान और उनके कैबिनेट सहकर्मियों ने आमराय से यह फैसला लिया कि किसी भी दोषी या विचाराधीन कैदी को मीडिया कवरेज नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही, उनका इंटरव्यू भी नहीं लिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री खान को उद्धृत करते हुए महमूद ने कहा, ‘‘जिन लोगों ने राष्ट्रीय संपत्ति की लूट खसोट की और देश को ढहने की कगार पर ला खड़ा कर दिया, उनका महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए। भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार हुए लोगों की मीडिया कवरेज करने या उनका इंटरव्यू लेने की इजाजत कोई भी लोकतंत्र नहीं देता है। ’’ 

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व प्रधानमंत्री शरीफ 24 दिसंबर 2018 से लाहौर के कोट लखपत जेल में सात साल की कैद की सजा काट रहे हैं। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति जरदारी को पार्क लेन मामले में एक जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। 

इसबीच, एएफपी की एक खबर के मुताबिक एक वैश्विक मीडिया निगरानी संस्था रिपोर्टर्स विदआउट बार्डर्स (आरएसएफ) ने देश के तीन टीवी चैनलों का प्रसारण रोके जाने को लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों की निंदा की है। इसने कहा है कि यह कदम तानाशाह प्रवृत्ति की है क्योंकि दक्षिण एशियाई राष्ट्र में पत्रकारों पर दबाव बढ़ रहा है। 

कुछ दिन पहले विपक्षी नेता मरयम नवाज की प्रेस कांफ्रेंस दिखाने के बाद अब तक टीवी, 24 न्यूज और कैपिटल टीवी, इन सभी के प्रसारण को रोक दिया गया है। वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा है कि ये चैनल तकनीकी मुद्दों को लेकर अनुपलब्ध हैं लेकिन आरएसएफ ने इस कार्रवाई को सेंसरशिप करार दिया। मरयम शरीफ की बेटी हैं। मरयम के संवाददाता सम्मेलन में एक न्यायाधीश का उल्लेख कर दावा किया गया था पूर्व प्रधानमंत्री को दोषी ठहराने के लिए उन्हें ब्लैकमेल किया गया।