BREAKING NEWS

Covid-19 : महाराष्ट्र में कोरोना से अबतक 19 की मौत, कुल पॉजिटिव मामले 416◾राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर 170 से अधिक FIR दर्ज - DP◾सोनिया ने लॉकडाउन पर उठाए सवाल तो भड़की BJP, शाह- नड्डा ने किया पलटवार◾मजनू का टीला गुरुद्वारे में रूके थे 225 लोग, गुरुद्वारे के प्रबंधकों पर पुलिस ने किया मामला दर्ज ◾कोरोना संकट : पीएम मोदी कल सुबह 9 बजे वीडियो जारी कर देशवासियों को देंगे संदेश◾24 घंटे में कोरोना के 328 नए मामले आए सामने, तबलीगी जमात से जुड़े 9000 लोगों को किया गया क्वारंटाइन : स्वास्थ्य मंत्रालय◾FIR दर्ज होते ही बदले मौलाना साद के तेवर, समर्थकों से की सरकार का सहयोग करने की अपील◾PM मोदी के साथ मीटिंग के बाद अरुणाचल प्रदेश CM बोले- लॉकडाउन समाप्त होने के बाद भी बरतें सावधानी◾सभी मुख्यमंत्रियों को PM मोदी का आश्वासन - कोरोना संकट को लेकर हर राज्य के साथ खड़ी है केंद्र सरकार◾इंदौर में स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने के मामले में 4 लोग गिरफ्तार, कई अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज◾देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या हुई 50, संक्रमित लोगों की संख्या में हुआ इजाफा ◾महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के तीन और मामले सामने आए, कुल संख्या 338 पर पहुंची ◾कोरोना वायरस : दुनिया भर में 925,132 लोगों में संक्रमण की पुष्टि, 46,291 लोगों की अब तक मौत◾पद्म श्री से सम्मानित स्वर्ण मंदिर के पूर्व ‘हजूरी रागी’ की कोरोना वायरस के कारण मौत ◾मध्य प्रदेश में कोरोना के 12 नए पॉजिटिव केस आए सामने, संक्रमितों की संख्या हुई 98 ◾कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए PM मोदी आज राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे चर्चा ◾Coronavirus : अमेरिका में कोविड -19 से छह सप्ताह के शिशु की हुई मौत◾कोविड-19 : संक्रमण मामलों में एक दिन में दर्ज की गई सर्वाधिक बढ़ोतरी, संक्रमितों की संख्या 1,834 और मृतकों की संख्या 41 हुई◾ट्रंप ने दी ईरान को चेतावनी, कहा- अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया तो चुकानी पड़ेगी भारी कीमत ◾NIA करेगी काबुल गुरुद्वारे हमले की जांच, एजेंसी ने किया पहली बार विदेश में मामला दर्ज ◾

इजरायल का हाइफा शहर, जिसे 99 वर्ष पहले भारतीय सैनिकों ने कराया था आजाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन दिवसीय इजरायल दौरे का आज आखिरी दिन है। आज वे इजरायल के शहर हाइफा जाएंगे। जहां पहले विश्वयुद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों को वे श्रद्धांजलि देंगे। इजरायल को हिंदुस्तान की बहादुरी और बलिदान से जोड़ता है। 99 साल पहले

\"\"

Source

विश्वयुद्ध में हिंदुस्तान के वीर योद्धाओं ने हाइफा को तुर्कों से मुक्त कराया था। उनके सम्मान में दिल्ली में तीन मूर्ति चौक भी बनाया गया है।इसका नाम बदलकर तीन मूर्ति हाइफा चौक किए जाने की चर्चा हो रही है।

जानें हाइफा शहर के बारे में

\"\"

Source

हाइफा इजरायल में समुद्र के किनारे बसा एक छोटा सा शहर है, लेकिन इस समय ये शहर दुनिया के दो मजबूत लोकतंत्रों को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी बन गया है। 99 साल पुराने युद्ध में हिंदुस्तानी वीरता ने इन्हें और मजबूती से जोड़ा है। ये लड़ाई 23 सितंबर 1918 को हुई थी। आज भी इस दिन को इजरायल में हाइफा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

जानें हाइफा युद्ध का पूरा इतिहास

\"\"

Source

प्रथम विश्वयुद्ध के समय भारत की 3 रियासतों मैसूर, जोधपुर और हैदराबाद के सैनिकों को अंग्रेजों की ओर से युद्ध के लिए तुर्की भेजा गया। हैदराबाद रियासत के सैनिक मुस्लिम थे, इसलिए अंग्रेजों ने उन्हें तुर्की के खलीफा के विरुद्ध युद्ध में हिस्सा लेने से रोक दिया। केवल जोधपुर व मैसूर के रणबांकुरों को युद्ध लड़ने का आदेश दिया। हाइफा पर कब्जे के लिए एक तरफ तुर्कों और जर्मनी की सेना थी तो दूसरी तरफ अंग्रेजों की तरफ से हिंदुस्तान की तीन रियासतों की फौज।

\"\"

Source

क्यों खास थी जीत

यह जीत और अधिक खास थी क्योंकि भारतीय सैनिकों के पास सिर्फ घोड़े की सवारी, लेंस (एक प्रकार का भाला) और तलवारों के हथियार थे। वहीं तुर्की सैनिकों के पास बारूद और मशीनगन थी। फिर भी भारतीय सैनिकों ने उन्हें धूल चटा दी। बस तलवार और भाले-बरछे के साथ ही भारतीय सैनिकों ने उन्हें हरा दिया. इसकी अगुवाई मेजर दलपत सिंह शेखावत कर रहे थे।

\"\"

Source

कुल 1,350 जर्मन और तुर्क कैदियों पर भारतीय सैनिकों ने कब्जा कर लिया था। अधिकारियों, 35 ओटोमन अधिकारियों, 17 तोपखाने बंदूकें और 11 मशीनगनों भी शामिल थे. इस दौरान, आठ लोग मारे गए और 34 घायल हुए, जबकि 60 घोड़े मारे गए और 83 अन्य घायल हुए। बता दें कि हाइफा भारतीय कब्रिस्तान में प्रथम विश्व युद्ध में मारे 49 सैनिकों की कब्रें हैं।

\"\"

Source

बता दें कि 23 सितंबर 1918 की ये जंग घुड़सवारी की सबसे बड़ी और आखिरी जंग थी, जिसने इजरायल बनने का रास्ता खोला। 1918 में यही हाइफा यहूदी पहचान बना। 14 मई 1948 को इजरायल बनने के बाद इस नए देश में यहूदियों के लिए रास्ता खुल गया। 1948 में जब इजरायल का अरब देशों से युद्ध शुरु हुआ तो एक बार फिर यही हाइफा युद्ध का केंद्र बना था।