कराकास : लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला के वर्तमान राष्ट्रपति निकोलस मुदरो ने एक बार फिर से राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। श्री मुदरो की जीत पर चुनावी बोर्ड ने कहा है कि उनके दोनों मुख्य प्रतिद्वंदियों ने चुनाव में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए इसे गैर कानूनी करार दिया है। चुनाव मंडल ने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति चुनाव में 46.1 प्रतिशत मतदान हुआ जो पिछली बार वर्ष 2013 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के मतदान 80 प्रतिशत से बहुत कम है। वेनेजुएला के मुख्य विपक्षी दल ने इस राष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार किया था जिसके कारण मतदान प्रतिशत में यह कमी दर्ज की गयी।

चुनाव परिणाम की घोषणा होने पर श्री मदुरो के समर्थकों ने राष्ट्रपति महल के आसपास आतिशबाजी की और जमकर थिरके। श्री मादुरो को 58 लाख वोट मिले जबकि दूसरे नंबर पर रहे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हेनरी फाल्कोन को 18 लाख मत मिले। अमेरिका पहले ही कह चुका है कि वह वेनेजुएला में रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव को मान्यता नहीं देगा। वेनेजुएला राष्ट्रपति चुनाव पर अनियमितता और बड़ पैमाने पर हिंसा के आरोप लगे हैं।

अमेरिका ने नहीं देगा मुदरो को मान्यता

अमेरिका वेनेजुएला में रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम को मान्यता नहीं देगा। अमेरिका के उपविदेश मंत्री जॉन सूलीवान ने पत्रकारों से यह बात कही।श्री सूलीवान ने कहा कि अमेरिका सक्रिय रूप से वेनेजुएला पर तेल से संबंधित प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में सोमवार को होने वाली जी-20 शिखर सम्मेलन की बैठक में वेनेजुएला के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा की जाएगी।

आर्थिक संकट और खाद्य पदार्थों की कमी का सामना कर रहे रहे लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में रविवार को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुए हैं। इस चुनाव में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो छह वर्षीय कार्यकाल के लिए मैदान में हैं। प्रमुख विपक्षी दलों ने इस चुनाव का बहिष्कार किया है। श्री मादुरो के दो बड़ प्रतिद्वंदी नेताओं को चुनाव लड़ने को लेकर प्रतिबंधित कर दिया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक पूर्व बस चालक श्री मादुरो के इस चुनाव में जीतने की संभावना प्रबल है। गौरतलब है कि संकटग्रस्त वेनेजुएला के लाखों नागरिक देश छोड़कर कोलंबिया तथा ब्राजील के अलावा अन्य देशों में शरण ले रहे हैं।

 

 

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