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किसानों का प्रदर्शन 57वें दिन जारी, आंदोलनकारी बोले- बैकफुट पर जा रही है सरकार, रद्द होना चाहिए कानून

कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 57वें दिन भी जारी है। वहीं एक प्रदर्शनकारी ने कहा "कल की बैठक में हमने देखा कि सरकार थोड़ा बैकफुट पर जा रही है। कानून स्थगित नहीं रद्द होना चाहिए।ये कानून पश्चिमी देशों में पहले लागू हो चुके हैं और वहां फेल हुए हैं।"

बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से डेढ़ साल तक कृषि कानूनों को होल्ड पर रखकर कमेटी के माध्यम से मुद्दों को सुलझाने के प्रस्ताव को किसान नेताओं ने सकारात्मक रूप से लिया है। किसान नेताओं का कहना है कि यह विचार करने लायक प्रस्ताव है। ऐसे में सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधि आपसी राय मशविरा कर 22 जनवरी को होने वाली 11 वें दौर की बैठक में सरकार को अपने रुख से अवगत कराएंगे।

सरकार के बड़ा स्टैंड लेने के बाद आंदोलन के जल्द सुलझने के आसार दिखाई देने लगे हैं। विज्ञान भवन की अब तक सभी 10 बैठकों में शामिल रहे किसान नेता शिवकुमार कक्का ने कहा, "हमें कमेटी पर भरोसा नहीं है, लेकिन सरकार ने कानूनों को होल्ड करने की बात कही है, यह जरूर विचार करने वाली बात है। केंद्र ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की है, हम कल इस पर चर्चा कर अपनी राय बनाएंगे।"

बैठक में मौजूद रहे किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा, "केंद्र सरकार ने हमसे कहा कि 3 कानूनों को होल्ड पर करने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट को एफिडेविट दे देंगे। दोनों पक्षों के बीच मुद्दों के सुलझने तक एक से डेढ़ साल तक कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की बात सरकार ने कही है। सरकार का यह प्रस्तााव विचार करने लायक है। ऐसे में 21 जनवरी को किसान संगठनों की मीटिंग में इस पर चर्चा होगी।"

ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हनन मुल्लाह ने भी सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही। उन्होंने कहा, "सरकार ने बैठक में कहा कि कोर्ट में एफिडेविट देकर हम कानून को डेढ़- दो साल तक रोक सकते हैं। इस दौरान कमेटी जो रिपोर्ट देगी, हम उसको लागू करेंगे। अब सभी किसान संगठन 21 जनवरी को सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा कर 22 जनवरी की बैठक में अपना जवाब देंगे। किसान नेताओं का रुख हमेशा से सकारात्मक रहा है।"

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