जम्मू कश्मीर में बीते मंगलवार को आतंकवादियों ने तीन अलग-अलग वारदातों में 90 मिनट के भीतर तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। यहां इकबाल पार्क क्षेत्र में श्रीनगर की प्रसिद्ध फार्मेसी के मालिक माखनलाल बिंदरू की उनके व्यावसायिक परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा केंद्रशासित प्रदेश में दो अन्य लोगों की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिनमें से एक बिहार का रहने वाला था और गोलगप्पे व भेलपूरी बेचकर अपनी रोजी-रोटी चलाता था।
आतंकी संगठन ने ली हमलों की जिम्मेदारी
आतंकी संगठन ‘द रेसिस्टेंस फोर्स’ (टीआरएफ) ने मंगलवार को हुए इन हमलों की जिम्मेदारी ली जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संगठन माना जाता है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इकबाल पार्क क्षेत्र में श्रीनगर की प्रसिद्ध फार्मेसी के मालिक माखनलाल बिंदरू की उनके व्यवसायकि परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि बिंदरू को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बिंदरू को चार गोलियां लगीं।
1990 में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के बाद नहीं किया पलायन
कश्मीरी पंडित समुदाय से बिंदरू उन कुछ लोगों में शामिल थे, जिन्होंने 1990 के दशक में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के बाद पलायन नहीं किया। वह अपनी पत्नी के साथ यहीं रहे और लगातार अपनी फार्मेसी ‘बिंदरू मेडिकेट’ को चलाते रहे। इस घटना के एक घंटे के भीतर आतंकवादियों ने शहर के हवाल क्षेत्र में एक गैर-स्थानीय रेहड़ी-पटरी विक्रेता की हत्या कर दी। अधिकारी ने बताया इसके बाद करीब साढ़े आठ बजे आतंकियों ने लाल बाजार इलाके में गोलगप्पा बेचने वाले विरेंद्र पासवान की हत्या कर दी। विरेंद्र पासवान बिहार के भागलपुर के रहने वाले हैं। जिसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। दूसरी हत्या के कुछ मिनटों के भीतर ही आतंकवादियों ने बांदीपुरा जिले के नैदखई में मोहम्मद शफी लोन नामक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी। लोन स्थानीय टैक्सी स्टैंड के अध्यक्ष थे।
नेताओं ने की शोक संवेदना प्रकट
बिंदरू की हत्या की निंदा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि वह गरीबों की मदद करनेवाले व्यक्ति थे। ठाकुर ने कहा, ‘‘बिंदरू की हत्या करने वालों का कोई धर्म नहीं है। मैं उनके परिवार के प्रति एकजुटता व्यक्त करता हूं और पुलिस से जल्द से जल्द दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने का आग्रह करता हूं।’’ वही जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने दुख जताया है। उन्होंने कहा, ”श्रीनगर में एक और लक्षित हमला गोलगप्पा बेचने वाले एक गरीब, गैर स्थानीय ठेला स्टॉल मालिक को गोली मार दी गई है और कथित तौर पर उसकी मौत हो गई है। निंदा के लिए हमारे पास शब्द नहीं हैं. उनकी आत्मा को शांति मिले।
कश्मीरी पंडित बिंदरू की बेटी ने आतंकवादी को दिखाई आंख
आतंकियों ने एम.एल. बिंदरू की गोली मारकर हत्या करने बाद उनकी बेटी श्रद्धा बिंदरू ने बुधवार को आतंकियों पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि उनके पिता एक फाइटर थे जो हमेशा कहते थे कि वह अपने जूते पहनकर मर जाएंगे।उन्होंने कहा, मेरी आंखों में एक भी आंसू नहीं है क्योंकि वह एक फाइटर थे, वह एक फाइटर की तरह मरे। उन्होंने हमेशा कहा, मैं अपने जूते पहनकर मर जाऊंगा।
राजनेताओं द्वारा दिए गए पत्थरों और बंदूकों के बजाय शिक्षा से लड़ें
श्रद्धा बिंदरू ने आतंकवादियों से कहा कि वे राजनेताओं द्वारा दिए गए पत्थरों और बंदूकों के बजाय शिक्षा से लड़ें। श्रद्धा बिंदरू ने कहा, वह कौन है जिसने मेरे पिता को गोली मार दी, मेरे सामने आओ, तुम्हारे पास कुछ शिक्षा है? मेरे पिता ने मुझे शिक्षा दी, राजनेताओं ने तुम्हें बंदूकें और पत्थर दिए, तुम बंदूक और पत्थरों से लड़ना चाहते हो, यह कायरता है, सभी राजनेता उपयोग कर रहे हैं आप सामने आएं और शिक्षा से लड़ें। मैं एक एसोसिएट प्रोफेसर हूं, मैंने शून्य स्तर से शुरूआत की, मेरे पिता ने साइकिल से शुरूआत की, मेरा भाई एक प्रसिद्ध मधुमेह रोग विशेषज्ञ है, मेरी मां दुकान में बैठती है, यही माखन लाल बिंदरू ने हमें बनाया है। एक कश्मीरी पंडित, वह कभी नहीं मरेंगे।
आतंकवादी एक खास संदेश देने के लिए कर रहे नागरिकों की हत्या
पिछले 30 वर्षों के दौरान प्रवासी पंडितों को घाटी में वापस लाने के लिए अब जमीनी स्तर पर कुछ काम होता हुआ दिखाई दे रहा है और इसी बीच इस तरह की घटना सोचने पर मजबूर कर देती है। एक निर्दोष कश्मीरी पंडित की हत्या करके, जिसने पलायन न करके वहीं बसे रहने का फैसला किया था, आतंकवादियों का इरादा समुदाय को एक शक्तिशाली संदेश भेजने का है। प्रवासी समुदाय के पहले से ही डगमगाए विश्वास को सरकार कैसे बहाल करती है, यह देखना होगा।
मंगलवार को दूसरी नागरिक की हत्या बिहार के एक रेहड़ी-पटरी वाले की थी। वह गरीब व्यक्ति श्रीनगर के लाल बाजार इलाके में सड़क किनारे भेलपुरी बेचता था।
अनुच्छेद 370 और 35ए के निरस्त होने के बाद से बौखलाए है आतंकी
उसे आतंकवादियों ने अनुच्छेद 370 और 35ए के निरस्त होने के बाद बाहरी लोगों को कश्मीर में बसने की अनुमति नहीं देने के नापाक मंसूबे पर जोर देने के लिए मार डाला।
तीसरी हत्या उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में हुई। बिंदरू की हत्या के तीन घंटे से भी कम समय में आतंकियों ने शाह मोहल्ला के मुहम्मद शफी लोन को मार गिराया था। लोन एक टैक्सी ड्राइवर था, जिसे हाल ही में सूमो टैक्सी ड्राइवर्स यूनियन का अध्यक्ष चुना गया था। क्षेत्र में ऐसी भी बातें की जा रही हैं कि कुछ साल पहले लोन के घर पर एक मुठभेड़ हुई थी, जिसमें कुछ आतंकवादी मारे गए थे।
कश्मीर में आतंकवादियों के लिए काम करने के संदेह में 2 लोग गिरफ्तार, ग्रेनेड और पिस्टल बरामद
कहा जा रहा है कि आतंकवादियों को लोन पर शक था कि उन्होंने सुरक्षा बलों को आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना दी थी। अफवाह विश्वसनीय हो या न हो, इस बात में शायद ही कोई संदेह हो कि आतंकी ने लोन को क्यों मारा। केवल संदेह के आधार पर हत्या करना कश्मीर में आतंकवादी हत्याओं की पहचान रही है। इन संदेश के तौर पर की गई हत्याओं की पृष्ठभूमि में, यह स्पष्ट है कि जब तक घाटी में रहने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, कश्मीरी पंडित प्रवासियों को वापस लाने की कोशिश भी एक जल्दबाजी वाला कदम ही मानी जाएगी।


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